“संविधान के अधिकारों का हनन”: क्रिसमस पर ईसाइयों के खिलाफ बढ़ी हिंसा, CBCI ने जताई ‘गहरी पीड़ा’, गृह मंत्री से सुरक्षा की गुहार

शफी उस्मानी
नई दिल्ली: क्रिसमस के पावन सीजन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे राज्यों से ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा और नफरत की खबरें सामने आने के बाद ‘कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया’ (CBCI) ने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। संस्था ने इन घटनाओं को संविधान द्वारा दी गई धार्मिक स्वतंत्रता पर बड़ा प्रहार बताया है।

- मध्य प्रदेश: जबलपुर में भाजपा की जिला पदाधिकारी अंजू भार्गव पर एक क्रिसमस कार्यक्रम के दौरान दृष्टिबाधित महिला से बदसलूकी करने का गंभीर आरोप लगा है।
- केरल: पलक्कड़ जिले के पुडुस्सेरी में रविवार रात कैरल गायकों के एक युवा समूह पर हमला किया गया। पुलिस ने इस मामले में अश्विन नाम के एक आदतन अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिस पर बीएनएस की धारा 110 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
- छत्तीसगढ़: यहाँ सोशल मीडिया पर 24 दिसंबर को ईसाइयों के खिलाफ ‘बंद’ का आह्वान करने वाले डिजिटल पोस्टर वायरल हो रहे हैं, जिसे CBCI ने हिंसा भड़काने वाली साजिश करार दिया है।
CBCI का कड़ा संदेश: CBCI ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, “ईसाइयों पर लक्षित हमलों में खतरनाक वृद्धि हमें गहरी पीड़ा पहुँचाती है। शांतिपूर्ण कैरल गायकों और चर्च में प्रार्थना करने वालों को निशाना बनाना भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों को कमजोर करना है।”
अमित शाह से की सुरक्षा की अपील: संस्था ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि नफरत फैलाने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। CBCI ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से विशेष आग्रह किया है कि वे देश के ईसाई समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून को सख्ती से लागू करें।
सिरो-मालाबार चर्च का बयान: मेजर आर्कबिशप मार राफेल थट्टिल ने कहा कि यह राज्य का कर्तव्य है कि वह धार्मिक चरमपंथी प्रवृत्तियों को नियंत्रित करे। उन्होंने जोर देकर कहा, “चाहे अल्पसंख्यक हों या बहुसंख्यक, सभी को अपने त्योहार शांति से मनाने का समान अधिकार है। देश को अब धर्म के नाम पर फूट डालने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए।”











