सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘उम्मीद पोर्टल’ की समय सीमा नहीं बढाने के फैसले के बाद ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल पंहुचा दिल्ली, बोले एसएम यासीन ‘ज़मा खान तुम भी औरों की तरह खुशी मनाओ, हमारे पुरखों के ज़रिए वक़्फ की गई मिल्कियत पर कब्जा हो गया’

शफी उस्मानी

डेस्क: सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एक मामले में सुनवाई करते हुवे ‘उम्मीद पोर्टल’ की समय सीमा बढ़ाये जाने से इंकार करने पर अब प्रतिक्रियाये आना शुरू हो गई है। इस सम्बन्ध में ज्ञानवापी मस्जिद की देख रेख करने वाली संस्था अंजुमन इन्तेज़मियां मसाजिद कमेटी का प्रतिनिधि मंडल कल देर रात ही संयुक्त सचिव एसएम यासीन के नेतृत्व में दिल्ली पहुच चूका है। प्रतिनिधि मंडल के द्वारा आज अधिवक्ताओं से मुलाकात किया जा रहा है तदुपरांत समयानुरूप सम्बन्धित मंत्रालय में भेट किया जायेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुवे ज्ञानवापी मस्जिद की देख रेख करने वाली संस्था अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कि ‘एक दिसम्बर का दिन भारत में बसने वाले अल्पसंख्यकों के लिए अत्यंत निराशाजनक रहा है। जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उम्मीद पोर्टल पर वक़्फ रजिस्ट्रेशन की समय सीमा 5 दिसमबर से आगे बढ़ाने से इन्कार कर दिया। माननीय न्यायालय का फ़ैसला सर आँखों पर है। बुझे मन से हमने बाबरी मस्जिद का फ़ैसला स्वीकार कर लिया था। वह कारा ज़ख्म अभी हरा ही था कि एक और ज़ख्म हमें मिला।’

एसएम यासीन ने कहा कि ‘यद्यपि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने वक़्फ ट्रिब्यूनल मे अपील की राहत दिया है लेकिन कितने लोग जा पाएंगे और अल्पसंख्यकों को कितना आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। सत्तारूढ़ दल और उसके समर्थक जीत गए। नितीश बाबू और नायडू जी की जय हो। हम हार गए। इन दलों में कौम के ग़द्दारों की भी जय हो। ज़मा खान तुम भी औरों की तरह खुशी मनाओ। हमारे पुरखों के ज़रिए वक़्फ की गई मिल्कियत पर कब्जा हो गया।’

उन्होंने पत्र के अंत में लिखा है कि ‘इन के साथ हमें अपनों से भी शिकायत है। मुसलमाना-ए-हिन्द पर हक़ रखने वाली जमात ने झूठे प्रचार में वक्त ग॔वा दिया। आल इन्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के अपने गलत फैसलों पर मातम करें। जो वक्त आन्दोलन में गंवाया, इतने समय में तो  अच्छा खासा रजिस्ट्रेशन हो गया होता। अब जमीयत उलमाए हिन्द और जमात इसलामी हिन्द एक जुट होकर, गांव गांव जाकर लोगों को वक़्फ ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करवाऐं। क्योंकि इनके पास अफराद के साथ माली वसाएल भी हैं। जमात इस्लामी हिन्द के पास ज़ेहन है जमीयत उलमा-ए हिन्द के पास गांव गांव अफराद हैं। लेकिन शर्त है दोनों तनज़ीमें एक जुट होकर कौम के मफाद में काम करें। वरना “इन्नल इल्लाहे इन्ना एलैहे राजेऊन…..!” अभी बहुत कुछ लिखना है, क़ौम का एक अदना सा फर्द एसएम यासीन….!

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