“ताजमहल पहले मंदिर था, शाहजहाँ ने बनवा दिया मकबरा”: भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा दावा, फिर गर्माया ‘तेजो महालय’ विवाद

प्रमोद कुमार
डेस्क: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ताजमहल को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। विजयवर्गीय ने अपने ताजा बयान में दावा किया है कि दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल दरअसल पहले एक मंदिर था, जिसे मुगल शासक शाहजहाँ ने मकबरे का रूप दे दिया।

इतिहास और विवाद का बैकग्राउंड: यह पहली बार नहीं है जब किसी भाजपा नेता ने ताजमहल के मंदिर होने की बात कही हो। इससे पहले भी कई बार कोर्ट में याचिकाएं दायर कर ताजमहल के बंद कमरों को खोलने और उसकी असलियत जानने की मांग की जा चुकी है। विजयवर्गीय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में ज्ञानवापी और शाही ईदगाह जैसे धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक सर्वेक्षणों को लेकर पहले से ही माहौल गर्म है।
विरोध और प्रतिक्रिया: विजयवर्गीय के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि भाजपा असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐतिहासिक स्मारकों पर विवाद पैदा कर रही है। वहीं, इतिहासविदों का एक बड़ा धड़ा इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के दस्तावेजों के आधार पर शुद्ध रूप से एक मकबरा ही मानता है।
ताजमहल विवाद: क्या है ‘तेजो महालय‘ का दावा?
- दावा: लेखक पी.एन. ओक ने तर्क दिया था कि यह एक शिव मंदिर था जिसे राजा जयसिंह से लेकर शाहजहाँ ने कब्जा लिया था।
- ASI का पक्ष: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कई बार कोर्ट में हलफनामा देकर स्पष्ट किया है कि ताजमहल हमेशा से एक मकबरा ही रहा है और इसके मंदिर होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।









