महाराष्ट्र में महायुति में बड़ा घमासान! निकाय चुनाव से पहले डिप्टी CM शिंदे और डिप्टी CM पवार में खुलकर ‘खींचतान’

तारिक खान
PNN24 न्यूज़ डेस्क: महाराष्ट्र में 2 दिसंबर को होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले, सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन (जिसमें भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) शामिल हैं) के भीतर गहरी दरारें साफ़ दिखने लगी हैं। सीट बंटवारे को लेकर शुरू हुआ आपसी टकराव अब उपमुख्यमंत्री (DCM) एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री (DCM) अजित पवार के बीच खुली बयानबाज़ी तक जा पहुंचा है, जिसने गठबंधन के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीट बंटवारे से शुरू हुआ तनाव
महायुति के नेताओं के बीच असंतोष सबसे पहले छोटे-छोटे स्थानीय चुनावों में सीटों के बँटवारे को लेकर सामने आया।
- कार्यकर्ताओं की ‘खरीद-फरोख्त’ के आरोप: दोनों शिवसेना और एनसीपी गुटों के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर पार्टी कार्यकर्ताओं को खरीदने और धमकाने के आरोप लगाए। इससे ज़मीनी स्तर पर आपसी विश्वास पूरी तरह खत्म हो गया।
- सत्ता की खींचतान: हर पार्टी निकाय चुनावों में अपना दबदबा बनाना चाहती है, जिससे आपसी समन्वय टूटने लगा और तीनों दलों के नेता अलग-अलग चुनाव प्रचार करते दिखे।
डिप्टी CM और डिप्टी CM में ‘शब्दों का युद्ध’
यह आंतरिक संघर्ष तब चरम पर पहुँच गया जब राज्य के सबसे बड़े नेताओं—डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम अजित पवार—के बीच सीधे बयानबाजी शुरू हो गई।
- परोक्ष हमले: सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में कुछ सार्वजनिक मंचों पर, दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर परोक्ष रूप से निशाना साधा। अजित पवार ने जहाँ फैसले लेने की गति पर सवाल उठाए, वहीं शिंदे गुट ने पुरानी सरकारों की कार्यशैली पर तंज कसा।
- अस्थिरता का माहौल: इस खुले टकराव ने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दल, खासकर महा विकास अघाड़ी (MVA), इन दरारों का लाभ उठाने की पूरी कोशिश कर रही है।
भाजपा की चुप्पी और ‘बड़े भाई’ की भूमिका
महायुति के भीतर चल रहे इस घमासान में भाजपा की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
- संतुलन बनाने की चुनौती: भाजपा, जो गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है, पर अब इन दोनों सहयोगियों के बीच संतुलन बनाने और विवाद को शांत करने का भारी दबाव है।
- चुनाव पर असर: राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि यह आपसी दरार जल्द ही नहीं भरी गई, तो 2 दिसंबर को होने वाले निकाय चुनावों में महायुति को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिलेगा।
महायुति में शामिल होने के बावजूद, सीएम और डीसीएम के बीच यह खुली खींचतान दिखाती है कि सत्ता में आना भले ही आसान हो, लेकिन सत्ता चलाना और गठबंधन को एकजुट रखना कितना मुश्किल है।










