ममता के गढ़ भवानीपुर में बड़ी ‘सेंध’…! ड्राफ्ट लिस्ट से 45 हज़ार वोटर गायब, सीएम ने पूछा- ‘जिंदा लोगों को मुर्दा कैसे बना दिया?’

ईदुल अमीन
PNN24 न्यूज़: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद आई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से करीब 45,000 वोटरों के नाम कट गए हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए इसे चुनाव आयोग की बड़ी चूक करार दिया है।
भवानीपुर: आंकड़ों का गणित
चुनाव आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट सूची के अनुसार, भवानीपुर में वोटरों की संख्या में भारी गिरावट आई है:
- कुल वोटर (पहले): 2,06,295
- ड्राफ्ट सूची में वोटर: 1,61,509
- हटाए गए नाम: 44,786
- ममता का बूथ: बूथ नंबर 260, जहाँ ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी वोट डालते हैं, वहाँ भी वोटरों की संख्या 270 से घटकर महज 127 रह गई है।
“जिंदा लोगों को मृत दिखाया” – ममता बनर्जी
मंगलवार को राज्य सचिवालय से लौटने के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) और वरिष्ठ नेताओं के साथ आपात बैठक की।
- गंभीर आरोप: मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके मतदान केंद्र पर जीवित लोगों को मृत बताकर उनके नाम काट दिए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग ने इतनी बड़ी लापरवाही कैसे की?
- अल्पसंख्यक क्षेत्रों पर नज़र: पार्टी सूत्रों के अनुसार, अल्पसंख्यक बहुल वार्ड नंबर 77 में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। ममता ने नेताओं को इस वार्ड पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।
- एक्शन प्लान: ममता ने कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर कटे हुए नामों की पुष्टि करने और प्रभावित लोगों की मदद के लिए हर मोहल्ले में ‘मे आई हेल्प यू‘ (May I Help You) शिविर लगाने का आदेश दिया है।
टीएमसी सांसद का हमला: “प्रक्रिया का मज़ाक बना दिया”
संसद के शीतकालीन सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया।
“एक मौजूदा काउंसलर को ही मृतक बता दिया गया। यही है इलेक्शन कमीशन! उन्होंने पूरी प्रक्रिया को मज़ाक बना दिया है। क्या उन्हें एक भी घुसपैठिया मिला?” — कल्याण बनर्जी, सांसद टीएमसी
पूरे बंगाल की स्थिति
पश्चिम बंगाल में मंगलवार को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार, पूरे राज्य से कुल 58 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना आने वाले चुनावों के मद्देनजर एक बड़ा विवाद बन सकता है।











