मनरेगा युग का अंत..! संसद से ‘जी राम जी’ बिल पास; शिवराज सिंह चौहान बोले- “कमियां दूर होंगी”, विपक्ष रातभर धरने पर बैठा

तारिक खान

PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। भारतीय संसद ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक और विवादित फैसले के तहत वीबी- जी राम जी (VB- GRAM JI) विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह नया कानून यूपीए शासनकाल की फ्लैगशिप योजना मनरेगा (MGNREGA) की जगह लेगा। बिल के पारित होने के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ और विपक्ष ने इसे ‘गरीबों के अधिकारों की हत्या’ करार दिया।

सरकार का पक्ष: “पुरानी योजना की कमियां होंगी दूर”

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि मनरेगा में कई विसंगतियां थीं जिन्हें सुधारना अनिवार्य था:

  • भ्रष्टाचार पर लगाम: मंत्री ने तर्क दिया कि नई योजना के तहत लीकेज को रोका जाएगा और तकनीक का बेहतर इस्तेमाल होगा।
  • विकासोन्मुखी दृष्टिकोण: सरकार के अनुसार, ‘जी राम जी’ योजना केवल गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य के साथ ग्रामीणों को कौशल विकास और स्थाई आजीविका से जोड़ेगी।
  • पारदर्शिता: नए कानून में आधार आधारित भुगतान और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को और अधिक कड़ा बनाया गया है।

विपक्ष का ‘रातभर’ धरना और ‘सड़क पर संग्राम’ की चेतावनी

विधेयक पारित होने के विरोध में विपक्षी दलों के सांसद गुरुवार रात संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए।

  • अधिकारों का हनन: कांग्रेस, आरजेडी, टीएमसी और आप जैसे दलों का कहना है कि सरकार ने ‘काम की गारंटी’ के कानून को ‘मिशन’ में बदलकर कमजोर कर दिया है।
  • राष्ट्रव्यापी आंदोलन: राहुल गांधी समेत अन्य नेताओं ने स्पष्ट किया है कि संसद में हार के बाद अब यह लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी। विपक्ष का दावा है कि इस बदलाव से करोड़ों खेतिहर मजदूरों का रोजगार छिन जाएगा।

क्या है ‘वीबी- जी राम जी’ (VB- GRAM JI)?

केंद्र सरकार ने इस अधिनियम का नाम विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) रखा है।

तुलना का आधार मनरेगा (MGNREGA) वीबी- जी राम जी (GRAM JI)
प्रकृति मांग-आधारित (कानूनी अधिकार) मिशन-आधारित (लक्ष्य-उन्मुख)
नाम महात्मा गांधी के नाम पर विकसित भारत के नाम पर
फोकस अकुशल श्रम (Unskilled Labor) कौशल विकास और आजीविका (Skilled/Semi-skilled)
कार्यान्वयन ग्राम पंचायतें प्रमुख थीं केंद्रीय/राज्य मिशन की भूमिका बढ़ेगी

मुख्य चिंताएं

आलोचकों का मानना है कि नए बिल में ‘काम की सीमा’ तय करने और बजट आवंटन के नए नियमों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की उपलब्धता घट सकती है। साथ ही, मनरेगा का नाम हटाना विपक्ष को एक राजनीतिक हमला महसूस हो रहा है।

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