‘वंदे मातरम्’ पर सियासी घमासान….! लोकसभा में PM मोदी के दावों पर विपक्ष का पलटवार, महंगाई-बेरोजगारी पर बहस की मांग, ओवैसी बोले ‘वफादारी का सर्टिफिकेट न मांगे’

आफताब फारुकी
PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। ‘वंदे मातरम्‘ के 150 साल पूरे होने के मौके पर सोमवार को लोकसभा में शुरू हुई चर्चा ने देश की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक जंग छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चर्चा की शुरुआत करते हुए जहाँ महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना का ज़िक्र किया, वहीं विपक्ष ने ज़रूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए आरक्षण, महंगाई और बेरोज़गारी पर बहस की मांग की।
PM मोदी के दावे: ‘वंदे मातरम्’ के साथ अन्याय क्यों?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया:
- गांधी और जिन्ना: पीएम मोदी ने सवाल उठाया कि जब बापू (महात्मा गांधी) को ‘वंदे मातरम्‘ नेशनल एंथम के रूप में दिखता था, तो इसके साथ अन्याय क्यों हुआ? उन्होंने यह भी कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने इसके खिलाफ सवाल उठाया था और जवाहरलाल नेहरू ने ‘वंदे मातरम्‘ की जांच शुरू की थी।
कांग्रेस का पलटवार: राष्ट्रीय गीत का दर्जा हमने दिया
विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी के दावों को खारिज करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाए और नेहरू के योगदान को याद किया।
- राष्ट्रीय गीत का दर्जा: कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ही ‘वंदे मातरम्‘ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। उन्होंने बताया कि मुस्लिम लीग के बहिष्कार की बात के बावजूद, संविधान सभा में राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आज़ाद और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेताओं की सहमति से इसे अपनाया गया।
- नेहरू के योगदान: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी पर इतिहास की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी जी जितने साल से देश के प्रधानमंत्री हैं, जवाहरलाल नेहरू जी उतने साल देश के लिए जेल में रहे हैं।” उन्होंने इसरो, डीआरडीओ, आईआईटी और एम्स जैसी संस्थाओं की नींव रखने के लिए नेहरू को श्रेय दिया।
- आरएसएस पर सवाल: कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी और इमरान मसूद ने आरएसएस पर हमला बोलते हुए पूछा कि जब महात्मा गांधी ‘अंग्रेज़ो भारत छोड़ो‘ का नारा दे रहे थे, तब उनकी मातृ संस्था अंग्रेज़ों की फौज में भर्ती होने के लिए क्यों कह रही थी?
ओवैसी और प्रियंका: ‘ज़रूरी मुद्दों से ध्यान भटकाना’
विपक्ष ने इस बहस को सरकार द्वारा वर्तमान समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश बताया।
- ओवैसी का संवैधानिक सवाल: एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्‘ को लेकर सरकार ज़बरदस्ती न करे, क्योंकि यह संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि “हमारे मुल्क के संविधान की शुरुआत ‘भारत माता‘ से नहीं बल्कि ‘हम भारत के लोग‘ से होती है।” उन्होंने ‘भारत में रहना है तो वंदे मातरम् गाना होगा‘ के नारे को असंवैधानिक बताया।
- प्रियंका गांधी का आरोप: प्रियंका गांधी ने कहा, “ये सरकार वर्तमान की असलियत छिपाना चाहती है।” उन्होंने सवाल किया कि सदन में बेरोज़गारी, महंगाई, पेपर लीक, आरक्षण के साथ खिलवाड़ और महिलाओं की स्थिति जैसे ज़रूरी मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही?
- सुरक्षा पर प्रश्न: गौरव गोगोई ने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में हुई हालिया सुरक्षा चूक का भी ज़िक्र करते हुए पूछा कि क्या हम वर्तमान के भारत को सुरक्षा दे पा रहे हैं?
यह बहस न केवल राष्ट्रीय गीत के महत्व पर है, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास, नेहरू के योगदान और वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं पर भी एक बड़ा राजनीतिक टकराव पैदा कर रही है।











