वाराणसी में ‘नीले से पीला’ वाले ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश; दवा के बदले सोना बनाने वाले शुभम जायसवाल के 5 गुर्गे गिरफ्तार, 6 करोड़ का काला खेल उजागर, शुभम सिंडिकेट पर वाराणसी पुलिस की कमर तोड़ कार्यवाई

तारिक आज़मी

वाराणसी: वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने नशीली दवाओं के अवैध कारोबार और उसके जरिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी स्ट्राइक की है। सारनाथ और रोहनिया थाना पुलिस ने संयुक्त कार्यवाही करते हुए एक ऐसे संगठित गिरोह को दबोचा है, जो नशीली दवाओं (कोडीन युक्त कफ सिरप) की तस्करी कर उसे सोने में तब्दील कर रहा था। पुलिस की इस कार्यवाही में 5 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।

नीले से पीला‘: गिरोह का सीक्रेट कोडवर्ड पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह ‘नीले से पीला’ कोडवर्ड का इस्तेमाल करता था। ‘नीला’ यानी कोडीन कफ सिरप और ‘पीला’ यानी सोना। ये लोग ₹100 की कफ सिरप को बांग्लादेश और अन्य राज्यों में ₹700 से ₹1000 तक में बेचते थे और उस 10 गुना मुनाफे को हवाला के जरिए सोने में बदलकर ब्लैक मनी को ठिकाने लगाते थे।

फर्जी फर्म और डमी मालिक का खेल: गिरोह ने पीडी फार्मा‘ (P.D. Pharma) नाम से एक फर्जी कंपनी बनाई थी। इसका असली मास्टरमाइंड लोकेश अग्रवाल और फरार शुभम जायसवाल है, लेकिन उन्होंने पुलिस को झांसा देने के लिए विष्णु कुमार पाण्डेय को डमी मालिक बना रखा था। टैक्स चोरी और ई-वे बिल से बचने के लिए ये लोग हमेशा 50,000 से कम की बिलिंग करते थे ताकि कोई डिजिटल रिकॉर्ड न बन सके।

हवाला ऑपरेटर के जरिए 6 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग: पुलिस की जांच में सामने आया है कि प्रतीक गुजराती नामक हवाला ऑपरेटर के माध्यम से करीब ₹6 करोड़ के काले धन को सफेद (Money Laundering) किया गया। सारनाथ पुलिस ने लोकेश अग्रवाल की निशानदेही पर भारी मात्रा में फर्जी बिल, लेटर पैड, लैपटॉप और मोहरें बरामद की हैं।

गिरफ्तार अभियुक्तों की सूची:

  1. सारनाथ पुलिस द्वारा: विष्णु कुमार पाण्डेय (सारनाथ) और लोकेश अग्रवाल (महमूरगंज)।
  2. रोहनिया पुलिस द्वारा: स्वप्निल केशरी (मुगलसराय), दिनेश यादव (मैदागिन) और आशीष यादव (जैतपुरा)।

पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन में हुई इस सफल कार्यवाही का नेतृत्व सारनाथ थाना प्रभारी पंकज कुमार त्रिपाठी और रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह ने किया। टीम में उ०नि० दुर्गेश सिंह, देवेन्द्र सिंह और साइबर सेल के जवान शामिल रहे। फिलहाल शुभम जायसवाल और प्रतीक गुजराती फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

सिंडिकेट के काम करने का तरीका (Modus Operandi)

  • स्टेप 1: फर्जी फार्मा कंपनी के नाम पर भारी मात्रा में कफ सिरप खरीदना।
  • स्टेप 2: ₹50 हजार से कम के फर्जी बिल बनाकर ई-वे बिल की चोरी करना।
  • स्टेप 3: बांग्लादेश सीमा पर 10 गुना दाम में तस्करी करना।
  • स्टेप 4: मुनाफे के पैसे को हवाला के जरिए सोने में बदलकर मनी लॉन्ड्रिंग करना।

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