प्रियंका गांधी का बड़ा हमला: संचार साथी ऐप ‘जासूसी ऐप’ है….!

आदिल अहमद

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने हाल ही में केंद्र सरकार के ‘संचार साथी (Sanchar Saathi)’ पोर्टल पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सीधे तौर पर दावा किया है कि यह ऐप और कुछ नहीं बल्कि ‘जासूसी का एक उपकरण’ (A tool for espionage) है, जिसका इस्तेमाल नागरिकों की निगरानी के लिए किया जा रहा है।

प्रियंका गांधी के इस बयान ने देश की डिजिटल दुनिया में हलचल मचा दी है और निजता (Privacy) के अधिकार पर एक नई बहस छेड़ दी है।

‘निगरानी के लिए बना है संचार साथी’

अपने सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों में प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार एक तरफ डिजिटल इंडिया की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे उपकरण तैयार कर रही है जो लोगों की व्यक्तिगत जानकारी (Personal Information) और संचार को ट्रैक कर सकें।

“संचार साथी’ ऐप आपकी सहायता के लिए नहीं, बल्कि आपकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए बनाया गया एक जासूसी ऐप है। यह ऐप सरकार को हमारे फोन कॉल, मैसेज और डेटा तक पहुँचने की शक्ति देता है। यह हमारी निजता पर सीधा हमला है।” प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस महासचिव

सरकार की मंशा पर सवाल

कांग्रेस नेता का आरोप है कि सरकार इस ऐप का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और यहाँ तक कि आम नागरिकों की निगरानी के लिए कर रही है। उनका दावा है कि इस ‘जासूसी’ की आड़ में सरकार असहमति की आवाज़ को दबाना चाहती है।

‘संचार साथी’ पोर्टल को संचार मंत्रालय द्वारा खोए हुए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ट्रैक करने और फर्जी कनेक्शनों की पहचान करने के लिए लॉन्च किया गया था। लेकिन प्रियंका गांधी ने इस ‘सकारात्मक’ उद्देश्य के पीछे ‘छिपे हुए एजेंडे’ पर उंगली उठाई है।

निजता के अधिकार का हनन

प्रियंका गांधी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में निजता का अधिकार (Right to Privacy) एक मौलिक अधिकार है और सरकार को किसी भी बहाने से इस अधिकार का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सरकार को इस ऐप के पीछे के असली उद्देश्य को सार्वजनिक करना चाहिए और यह बताना चाहिए कि वह नागरिकों के डेटा की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगी।

इस बीच, सत्तारूढ़ पार्टी और संचार मंत्रालय ने अभी तक प्रियंका गांधी के इस ‘जासूसी ऐप’ वाले गंभीर आरोप पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है। आने वाले दिनों में यह विवाद डिजिटल निजता को लेकर देश की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रूप ले सकता है।

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