“20 साल की मेहनत को एक दिन में ढहा दिया” – मनरेगा खत्म करने पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा प्रहार

आफताब फारुकी
PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘वीबी- जी राम जी’ (VB- GRAM JI) बिल को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राहुल गांधी ने इस नए कानून को “गांव विरोधी” और “गरीब विरोधी” करार देते हुए सरकार पर मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को सोची-समझी साजिश के तहत खत्म करने का आरोप लगाया है।
“एक रात में ढहाया 20 साल का भरोसा”
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन: राहुल ने आरोप लगाया कि इस बिल को बिना किसी पर्याप्त जांच-परख के जल्दबाजी में पारित किया गया। विपक्ष की निरंतर मांग के बावजूद इसे संसद की स्थायी समिति (Standing Committee) के पास नहीं भेजा गया।
- मजदूरों की ‘सौदेबाजी‘ की ताकत खत्म: उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि इसने ग्रामीण मजदूरों को शोषण के खिलाफ सौदेबाजी की ताकत दी थी, जिससे मजबूरी में होने वाला पलायन रुका और मजदूरी की दरों में सुधार हुआ।
- सुरक्षा कवच पर हमला: राहुल गांधी के अनुसार, कोविड-19 महामारी के दौरान जब देश की अर्थव्यवस्था ठप थी, तब मनरेगा ने ही करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज के जाल में फंसने से बचाया था।
महिलाओं के अधिकारों पर चोट
राहुल गांधी ने विशेष रूप से महिलाओं पर इसके प्रभाव का जिक्र किया:
“मनरेगा से सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को हुआ था। हर साल आधे से ज्यादा कार्य-दिवस (Work Days) महिलाओं के नाम रहे। यह बिल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आजादी और सुरक्षा को कमजोर करता है।” — राहुल गांधी
‘जी राम जी’ बिल पर राहुल की 3 बड़ी आपत्तियां
| क्रम | राहुल गांधी की आपत्ति | संभावित असर |
| 1 | काम की सीमा तय करना | मजदूरों को मिलने वाले गारंटीड काम के दिनों में कमी आएगी। |
| 2 | काम से इनकार के नए रास्ते | सरकार तकनीकी आधार पर मजदूरों को काम देने से मना कर सकेगी। |
| 3 | अधिकारों का कमजोर होना | ‘काम का कानूनी अधिकार’ अब सरकार की ‘मर्जी’ पर निर्भर हो सकता है। |
देशव्यापी आंदोलन का आह्वान
राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगी। उन्होंने घोषणा की कि:
- कांग्रेस पार्टी मजदूरों, पंचायतों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस ‘गांव विरोधी’ कानून के खिलाफ देशभर में आंदोलन करेगी।
- पार्टी की मांग है कि ग्रामीण गरीबों की “आखिरी सुरक्षा” (मनरेगा) को बहाल किया जाए और इस नए कानून को वापस लिया जाए।










