बड़ा सियासी ‘यू-टर्न’…..! बाबरी विध्वंस की बरसी पर स्कूलों में ‘शौर्य दिवस’ मनाने का आदेश 12 घंटे में वापस

ईदुल अमीन
PNN24 न्यूज़ डेस्क: राजस्थान में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा होते-होते रह गया। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के दिन यानी 6 दिसंबर को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में ‘शौर्य दिवस’ (Valour Day) मनाने का आदेश जारी किया था, लेकिन सियासी विरोध और संभावित तनाव को देखते हुए, यह आदेश जारी होने के महज 12 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया गया।
आदेश जारी हुआ और तत्काल विरोध शुरू
राजस्थान शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह आदेश गुरुवार देर शाम जारी किया था। इस आदेश में सभी शिक्षण संस्थानों को 6 दिसंबर को ‘शौर्य दिवस’ मनाने और छात्रों को राष्ट्र नायकों की वीरता से अवगत कराने का निर्देश दिया गया था।
- विवाद का केंद्र: यह आदेश तुरंत विवादों में घिर गया। 6 दिसंबर को ही बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ था, जिसे कुछ संगठन शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं, जबकि अन्य इसे काला दिवस के रूप में देखते हैं।
- विपक्ष और आलोचक: आदेश आते ही कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसका सख्त विरोध शुरू कर दिया। आलोचकों ने आरोप लगाया कि यह कदम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और सरकारी संस्थानों के राजनीतिकरण की कोशिश है।
12 घंटे में वापस लिया गया फैसला
विवाद बढ़ने और पूरे राज्य में सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका को देखते हुए, राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई की।
- तत्काल निलंबन: अगले दिन शुक्रवार सुबह तक, यानी आदेश जारी होने के 12 घंटे से भी कम समय में, शिक्षा विभाग ने यह विवादास्पद सर्कुलर तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया।
- डैमेज कंट्रोल: सूत्रों का कहना है कि सरकार ने महसूस किया कि इस तरह के आदेश से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और यह फैसला प्रशासनिक स्तर पर चूक थी। इस यू-टर्न को डैमेज कंट्रोल की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सियासत और शिक्षा का टकराव
इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक और धार्मिक विवादों से दूर रखने के महत्व पर ज़ोर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील ऐतिहासिक तारीखों पर सरकारी आदेश जारी करने से पहले प्रशासन को अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। फिलहाल, आदेश वापस लेने से राज्य में संभावित बड़ा टकराव टल गया है।










