अरावली के अस्तित्व पर संकट…! सचिन पायलट का BJP सरकार पर तीखा हमला, बोले- ‘खनन माफियाओं के लिए रास्ते खोल रही सरकार’

आदिल अहमद
डेस्क: राजस्थान की राजनीति के दिग्गज और कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने अरावली पर्वत श्रृंखला की ‘नई परिभाषा’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्र और राज्य सरकारों की घेराबंदी शुरू कर दी है। पायलट ने आरोप लगाया है कि सरकार के इस कदम से अरावली का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और यह कदम सीधे तौर पर खनन माफियाओं को फायदा पहुँचाने वाला है।
क्या है ‘नई परिभाषा’ जिस पर मचा है बवाल?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद अरावली की एक नई परिभाषा को स्वीकार किया है। इस नए नियम के मुताबिक, अब केवल उन्हीं हिस्सों को ‘अरावली पहाड़ी’ माना जाएगा जो आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ऊंचे हैं।
विपक्ष और पर्यावरण प्रेमियों का तर्क है कि इस परिभाषा के लागू होने से अरावली का एक बड़ा हिस्सा ‘पहाड़’ की श्रेणी से बाहर हो जाएगा, जिससे वहां धड़ल्ले से निर्माण कार्य और खनन किया जा सकेगा।
“पूरी तरह बेनकाब हो गई है सरकार” – सचिन पायलट
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सचिन पायलट ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा:
“अरावली के मुद्दे पर सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। जिस तरह की नीतियां बनाई जा रही हैं, उससे साफ है कि इन्हें हमारी प्राचीन पर्वत श्रृंखला को बचाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर अरावली नष्ट हो गई, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी?”
पायलट ने आगे कहा कि आज गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली—इन चारों राज्यों के साथ-साथ केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है। इसके बावजूद कोर्ट में ऐसी दलीलें दी जा रही हैं जो अरावली के खात्मे का कारण बनेंगी।
अवैध खनन पर दागे तीखे सवाल
सचिन पायलट ने सीधा सवाल किया कि अरावली में लंबे समय से चल रहे अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? उन्होंने चेतावनी दी कि प्रकृति के साथ इस तरह का खिलवाड़ राजस्थान और पड़ोसी राज्यों के लिए भविष्य में भारी पारिस्थितिक संकट (Ecological Crisis) पैदा कर सकता है।
26 दिसंबर को जयपुर में ‘हल्ला बोल’
अरावली को बचाने के लिए कांग्रेस अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। पायलट ने घोषणा की है कि:
- 26 दिसंबर को जयपुर में एक विशाल मार्च निकाला जाएगा।
- कांग्रेस के छात्र संगठन और युवा साथी इस मुद्दे पर जन-जागरूकता यात्रा निकाल रहे हैं।
PNN24 News की राय: अरावली न केवल राजस्थान की शान है, बल्कि यह थार मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकने वाली एक प्राकृतिक दीवार भी है। अगर राजनीतिक खींचतान में इसकी परिभाषा बदली जाती है, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है।










