अरावली को बचाने सड़कों पर उतरे सचिन पायलट; केंद्र पर बोला हमला, कहा- “अरावली नष्ट हुई तो दिल्ली तक पहुँच जाएगा रेगिस्तान”

शफी उस्मानी

जयपुर: अरावली पहाड़ियों की ‘नई परिभाषा’ को लेकर राजस्थान में सियासी पारा चढ़ गया है। शुक्रवार को जयपुर में एनएसयूआई (NSUI) राजस्थान द्वारा आयोजित ‘सेव द अरावली’ (Save The Aravalli) मार्च में कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अरावली के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया।

रेगिस्तान के फैलाव की दी चेतावनी: पायलट ने एक बड़ी भौगोलिक चेतावनी देते हुए कहा, “राजस्थान में रेगिस्तान का जो फैलाव है, वह केवल अरावली पर्वतमाला की वजह से रुका हुआ है। अगर अगले कुछ सालों में अरावली को इसी तरह नष्ट किया गया, तो रेगिस्तान दिल्ली तक पहुँच सकता है।” उन्होंने कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं बल्कि एक सुरक्षा कवच है जिसे ‘नई परिभाषा’ के नाम पर कमजोर किया जा रहा है।

“डबल नहीं, यह चार इंजन वाली सरकार है”: बीजेपी के ‘डबल इंजन’ के नारे पर कटाक्ष करते हुए सचिन पायलट ने कहा, “यह डबल इंजन नहीं बल्कि चार इंजन वाली सरकार है। और ये चारों इंजन इस बात के लिए दौड़ रहे हैं कि कैसे अरावली पर्वत को नष्ट किया जाए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार या तो माइनिंग माफियाओं के सामने विवश है या फिर उनकी मदद कर रही है, क्योंकि सरकार ने अब तक इस परिभाषा को बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

विवाद की जड़: 100 मीटर का नियम विवाद केंद्र सरकार की उस सिफारिश से है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया है। इसके तहत:

  • अब केवल 100 मीटर (328 फीट) से ऊँचे हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा।
  • पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे 100 मीटर से छोटी लेकिन महत्वपूर्ण झाड़ियों वाली पहाड़ियां सुरक्षा के दायरे से बाहर हो जाएंगी और वहां खनन व निर्माण शुरू हो जाएगा।

सरकार का डैमेज कंट्रोल: भारी विरोध और सचिन पायलट जैसे नेताओं के सड़कों पर उतरने के बाद, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अरावली क्षेत्र में किसी भी नई माइनिंग लीज़ (Mining Lease) देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह रोक पूरी अरावली पर लागू होगी, चाहे पहाड़ी की ऊँचाई कितनी भी हो।


पायलट के भाषण की 3 बड़ी बातें:

  • पर्यावरण का संकट: अरावली का विनाश दिल्ली-NCR के लिए रेगिस्तान का दरवाजा खोल देगा।
  • कानूनी निष्क्रियता: सरकार सुप्रीम कोर्ट में अरावली के पुराने स्वरूप को बचाने की पैरवी नहीं कर रही है।
  • युवाओं का समर्थन: NSUI और ‘जेन ज़ी’ के युवाओं का इस आंदोलन से जुड़ना भविष्य के लिए शुभ संकेत है।

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