हर नए फ़ोन में होगा ‘संचार साथी’……! सरकार का बड़ा निर्देश, अब कंपनियाँ करेंगी इंस्टॉल

फारुख हुसैन

नई दिल्ली: देश में साइबर सुरक्षा और खोए हुए फ़ोनों की ट्रैकिंग को लेकर केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। अब देश की सभी मोबाइल फ़ोन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे हर नए फ़ोन में अनिवार्य रूप से सरकारी ‘संचार साथी (Sanchar Saathi)’ ऐप को इंस्टॉल करें। यह निर्देश देश में सुरक्षा (Security) और उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।

क्या है सरकार का नया आदेश?

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय संचार मंत्रालय ने सभी मोबाइल हैंडसेट निर्माताओं (Mobile Handset Manufacturers) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इस निर्देश के मुताबिक, अब किसी भी नए स्मार्टफोन या फ़ीचर फ़ोन की बिक्री से पहले, उसमें ‘संचार साथी’ पोर्टल से जुड़े एप्लीकेशन को प्री-इंस्टॉल्ड (Pre-installed) करना होगा।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सरकार के इस महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण की पहुँच देश के हर नागरिक तक हो सके, और लोग खोए हुए फ़ोनों को ट्रैक करने तथा फर्जी या धोखे वाले कनेक्शनों की पहचान आसानी से कर सकें।

क्यों ज़रूरी है ‘संचार साथी’?

‘संचार साथी’ पोर्टल को संचार मंत्रालय ने मई 2023 में लॉन्च किया था। इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. खोए/चोरी हुए फ़ोन की ट्रैकिंग: यह यूज़र्स को अपने फ़ोन के IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर को ब्लॉक करने और ट्रैक करने की सुविधा देता है।
  2. धोखाधड़ी पर लगाम: यह लोगों को उनके नाम पर जारी किए गए फर्जी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देता है, जिससे वे उन्हें बंद करा सकें।
  3. सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम: इसका लक्ष्य धोखाधड़ी (Fraud) को कम करके देश में एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाना है।

लोगों की निजता पर सवाल

जहाँ एक ओर सरकार इस कदम को सुरक्षा के लिए ज़रूरी बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों में निजता (Privacy) को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। हाल ही में, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसी ऐप को एक ‘जासूसी ऐप’ करार दिया था। आलोचकों का मानना है कि फ़ोन में अनिवार्य रूप से इस ऐप को डालने से सरकार के पास नागरिकों की निगरानी करने की क्षमता बढ़ सकती है।

हालांकि, सरकार का पक्ष है कि यह ऐप केवल फ़ोन के IMEI और सिम कार्ड डेटा से संबंधित जानकारी का उपयोग करता है, न कि यूज़र के व्यक्तिगत डेटा या चैट की निगरानी करता है। फिर भी, प्री-इंस्टॉल्ड किए जाने का निर्देश निजता और निगरानी की बहस को और गरमाएगा। नए फ़ोन खरीदने वाले यूज़र्स के लिए अब यह सरकारी ऐप एक अनिवार्य हिस्सा होगा, जिसका इस्तेमाल करके वे खुद को डिजिटल धोखे से सुरक्षित रख सकेंगे।

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