शिमला मस्जिद विवाद में बड़ी राहत! हिमाचल हाईकोर्ट ने विध्वंस के आदेश पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी

तारिक आज़मी

PNN24 न्यूज़ डेस्क: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित संजौली मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दिए गए ऊपरी मंजिल को गिराने के आदेश पर फिलहाल रोक (Stay) लगा दी है। इस फैसले से मस्जिद प्रबंधन और वक्फ बोर्ड को बड़ी राहत मिली है।

यह आदेश हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड की याचिका पर आया है, जिसने निचली अदालत के मस्जिद को पूरी तरह से गिराने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

निचली अदालत का आदेश क्या था?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब निचली जिला अदालत ने संजौली मस्जिद को पूरी तरह से अवैध निर्माण मानते हुए उसे गिराने का आदेश दिया था।

  • आधार: निचली अदालत ने यह आदेश इसलिए दिया था, क्योंकि मस्जिद समिति और वक्फ बोर्ड वैध निर्माण अनुमति (Construction Permit) या जमीन के दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाए थे।
  • पूर्ण विध्वंस का आदेश: जिला अदालत का फैसला मस्जिद के पूर्ण विध्वंस का था, जिसके बाद स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में तनाव बढ़ गया था।

हाई कोर्ट का अंतरिम स्टे और वर्तमान स्थिति

वक्फ बोर्ड ने तुरंत इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम राहत प्रदान की है:

  • रोक का फैसला: हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि मस्जिद की ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर जैसी हैं, वैसी ही रहेंगी
  • ऊपरी मंजिल सुरक्षित: निचली अदालत द्वारा ऊपरी मंजिल को गिराने का जो आदेश दिया गया था, जब तक मामले पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर को तोड़ा नहीं जाएगा
  • अगली सुनवाई: मामले पर अंतिम फैसला हाई कोर्ट की अगली सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा, जिसकी तारीख 9 मार्च 2026 निर्धारित की गई है।

स्थानीय तनाव बरकरार

इस कानूनी विवाद ने संजौली इलाके में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।

  • विरोध: स्थानीय लोगों और कुछ हिंदू संगठनों में इस मस्जिद निर्माण को लेकर गहरा विरोध है। ये संगठन मस्जिद का बिजली-पानी कनेक्शन काटने और उसे पूरी तरह से गिराने की मांग कर रहे हैं।
  • हाई कोर्ट पर उम्मीद: अब सबकी निगाहें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो न केवल इस मस्जिद का भविष्य तय करेगा, बल्कि निर्माण अनुमति और वक्फ संपत्तियों के वैधता से जुड़े कई सवालों का भी जवाब देगा।

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