मनरेगा बनाम ‘जी राम जी’ बिल: विरोध की सुलगती आग…! जानें किन राज्यों में है सबसे ज्यादा गुस्सा और क्या है सरकारों का रुख

शफी उस्मानी

डेस्क: मनरेगा (MGNREGA) को खत्म कर ‘वीबी- जी राम जी’ बिल लाने के केंद्र सरकार के फैसले ने देश के संघीय ढांचे में एक नई बहस छेड़ दी है। चूंकि कई राज्यों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह मनरेगा पर टिकी थी, इसलिए गैर-भाजपा शासित राज्यों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

यहाँ उन प्रमुख राज्यों की सूची और उनके विरोध का कारण दिया गया है:

1. पश्चिम बंगाल: सबसे मुखर विरोध

  • सरकार का रुख: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे ‘गरीबों के पेट पर लात’ बताया है।
  • विरोध का कारण: बंगाल में मनरेगा फंड को लेकर पहले से ही केंद्र के साथ खींचतान चल रही है। राज्य सरकार का मानना है कि नया बिल बंगाल के करोड़ों मजदूरों को उनके हक से वंचित करने का एक और ‘हथियार’ है।
  • एक्शन: टीएमसी ने राज्यभर के बूथों पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है।

2. राजस्थान: ग्रामीण मज़दूरों का गढ़

  • प्रभाव: राजस्थान में मनरेगा के तहत सबसे ज्यादा कार्य-दिवस सृजित किए जाते रहे हैं।
  • विरोध का कारण: यहाँ का सामाजिक कार्यकर्ता समूह (जैसे ‘मज़दूर किसान शक्ति संगठन’) और विपक्ष इसे ‘रोजगार की गारंटी’ के अंत के रूप में देख रहे हैं। विशेष रूप से अकाल या सूखे के समय यह योजना यहाँ के ग्रामीणों का इकलौता सहारा रही है।

3. छत्तीसगढ़: आदिवासी अंचलों की चिंता

  • विपक्ष का तर्क: कांग्रेस यहाँ आदिवासियों के बीच यह नैरेटिव सेट कर रही है कि ‘जी राम जी’ बिल के जरिए केंद्र सरकार अब स्थानीय पंचायतों की ताकत छीनकर इसे ‘मिशन मोड’ में सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीकृत) कर रही है।
  • चिंता: आदिवासियों के लिए वन क्षेत्रों में काम की उपलब्धता कम होने का डर।

4. तमिलनाडु और केरल: महिलाओं का सशक्तिकरण

  • प्रभाव: इन दोनों राज्यों में मनरेगा के 80% से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं।
  • सरकारों का रुख: डीएमके (DMK) और वामपंथी सरकार ने चेतावनी दी है कि नए बिल में ‘काम की सीमा’ तय करने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता (Financial Autonomy) खत्म हो जाएगी।
  • केरल का मॉडल: केरल सरकार ने कहा कि वे इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि यह राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप है।

5. बिहार: पलायन का खतरा

  • विरोध का कारण: बिहार के लिए मनरेगा पलायन रोकने का सबसे बड़ा जरिया था। विपक्षी दल (RJD) का दावा है कि यदि काम की कानूनी गारंटी खत्म हुई, तो राज्य से दूसरे शहरों की ओर ‘मजबूरी का पलायन’ फिर से रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाएगा।

राज्यों के विरोध के 3 मुख्य तकनीकी कारण

कारण राज्यों की आपत्ति
फंडिंग पैटर्न राज्यों को डर है कि नए मिशन में केंद्र की हिस्सेदारी कम हो सकती है और राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
पंचायती राज मनरेगा में ग्राम सभाओं की अहम भूमिका थी। नए बिल में नौकरशाही (Bureaucracy) का दखल बढ़ने की आशंका है।
पेमेंट गेटवे आधार-आधारित भुगतान की अनिवार्यताओं और नए तकनीकी नियमों से अनपढ़ मजदूरों को काम मिलने में बाधा आएगी।

क्या होगा अगला कदम?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने ‘संयुक्त विपक्ष’ के बैनर तले उन राज्यों में ‘पंचायत चलो’ अभियान शुरू करने का फैसला किया है जहाँ मनरेगा का आधार सबसे मजबूत है। जनवरी 2026 में इसके खिलाफ दिल्ली में एक बड़ी रैली की भी सुगबुगाहट है।

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