मादुरो को किसका साथ? अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच वेनेज़ुएला से कटने लगे रूस और चीन, विशेषज्ञ बोले- ‘समर्थन अब सिर्फ़ प्रतीकात्मक’

मो0 सलीम

PNN24 न्यूज़: वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के लिए यह सोचना स्वाभाविक है कि वैश्विक संकट के इस दौर में उनके असली दोस्त कौन हैं। एक समय रूस और चीन पर उनकी जो बेहद मजबूत निर्भरता थी, अब वह अनिश्चित दिखाई दे रही है। अमेरिका द्वारा कैरिबियन में विशाल सैन्य तैनाती और तेल टैंकरों की जब्ती के बीच, विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेज़ुएला को इन दोनों सहयोगी देशों से मिलने वाला समर्थन अब काफ़ी हद तक प्रतीकात्मक रह गया है।

पहले की प्राथमिकता अब कम

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ के दौर से ही रूस और चीन ने वेनेज़ुएला की समाजवादी सरकार को राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य समर्थन दिया था। लेकिन अब स्थितियाँ बदल गई हैं।

  • प्राथमिकता में कमी: चिली की आंद्रेस बेलो यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर फ़र्नांडो रेयेस मत्ता का कहना है कि वेनेज़ुएला अब चीन और रूस दोनों के लिए ‘काफ़ी कम प्राथमिकता वाला मुद्दा’ बन चुका है, ख़ासकर डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद।
  • बदलते समीकरण: रेयेस मत्ता के अनुसार, “आज रूस या चीन, किसी के पास भी वेनज़ुएला की पूरी तरह से रक्षा करने के लिए उतरने की कोई ठोस वजह नहीं है।”

यूक्रेन युद्ध और टैरिफ़ का डर

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन दोनों की अपनी-अपनी अंतरराष्ट्रीय मजबूरियां हैं, जिसके कारण वे वेनेज़ुएला को ठोस समर्थन देने से पीछे हट रहे हैं।

  • रूस की मजबूरी: कोलंबिया की इसेसी यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर व्लादिमीर रुविंस्की के अनुसार, 2022 में यूक्रेन युद्ध में भारी संसाधन झोंकने और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना करने के कारण रूस की आर्थिक और सैन्य क्षमता पर दबाव बढ़ा है। इससे सहयोगी देशों के लिए संसाधन कम बचे हैं।
  • चीन का डर: प्रोफ़ेसर रुविंस्की कहते हैं, “रूस पहले से ज़्यादा प्रतिबंध झेलने का जोख़िम नहीं लेगा और चीन मादुरो की रक्षा के लिए अपने ऊपर और टैरिफ़ लगवाने का ख़तरा नहीं उठाएगा।” चीन इस समय ट्रंप प्रशासन के साथ ‘सह-अस्तित्व’ बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका का ‘असली मक़सद’ सत्ता परिवर्तन

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका ने वेनेज़ुएला के तट पर परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी, जासूसी विमान और 15,000 सैनिकों की भारी तैनाती कर दी है।

  • ट्रंप प्रशासन का दावा: अमेरिका इन कार्रवाइयों को ड्रग्स तस्करी के ख़िलाफ़ कार्रवाई का हिस्सा बता रहा है।
  • मादुरो और विशेषज्ञों का दावा: मादुरो सहित कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का असली मक़सद सत्ता परिवर्तन करना है, न कि केवल ड्रग्स रोकना।

ऐसे में, जब वेनेज़ुएला पर सैन्य हस्तक्षेप का खतरा मंडरा रहा है, तो रूस और चीन का ठोस सैन्य या आर्थिक सहयोग देने के बजाय केवल जुबानी समर्थन देना मादुरो के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

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