बड़ी खबर: लोकसभा में ‘जी राम जी’ (GRAM JI) बिल पारित! मनरेगा का अंत? संजय सिंह की सरकार को चेतावनी- “काले कानूनों की तरह वापस लेना होगा”

तारिक खान
PNN24 न्यूज़: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार की दिशा में एक ऐतिहासिक और विवादित कदम उठाते हुए ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी- जी राम जी’ (VB- GRAM JI) विधेयक को गुरुवार को लोकसभा में पारित करवा लिया है। यह नया कानून यूपीए (UPA) शासन काल की महत्वाकांक्षी मनरेगा (MGNREGA) योजना की जगह लेगा। बिल के पारित होने के साथ ही संसद से सड़क तक विरोध की लहर तेज़ हो गई है।
“यह बहुत बड़ा विश्वासघात है”: संजय सिंह
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने इस बिल को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर प्रहार बताया।
- काले कानून से तुलना: संजय सिंह ने सरकार को आगाह करते हुए कहा, “यह बहुत बड़ा विश्वासघात है। मैं सरकार को आगाह करना चाहता हूँ कि जैसे आपने तीनों किसानों के काले कानूनों को वापस लिया, वैसे ही आपको इस बिल को भी वापस लेना होगा।”
- आंदोलन की चेतावनी: उन्होंने घोषणा की कि इस कानून के खिलाफ देश भर में जन-आंदोलन होगा।
- नाम पर तंज: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार योजना के आकर्षक नाम (GRAM JI) के पीछे अपनी विफलताओं और “गुनाहों” को छिपाना चाहती है।
मनरेगा बनाम ‘जी राम जी’: क्या-क्या बदलेगा?
विपक्षी दलों का तर्क है कि यह केवल नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि योजना की मूल भावना में बड़े बदलाव किए गए हैं:
- कानूनी बाध्यता: विपक्ष को डर है कि “अधिनियम” (Act) को “मिशन” में बदलने से रोजगार देने की कानूनी गारंटी कमजोर हो सकती है।
- बजट और भुगतान: फंड आवंटन और भुगतान की प्रक्रियाओं में बदलाव की आशंका है, जिससे राज्यों और लाभार्थियों पर असर पड़ सकता है।
- शर्तों में बदलाव: नए बिल में रोजगार की शर्तों और पात्रता के मापदंडों में भी कई बदलाव प्रस्तावित हैं, जिनका विवरण अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है।
संसद में भारी विरोध
गुरुवार को जब यह बिल सदन के पटल पर रखा गया, तो कांग्रेस, टीएमसी, आप और अन्य विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने बिना विस्तृत चर्चा और राज्यों से मशविरा किए इतने बड़े बदलाव को अंजाम दिया है।
वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल ‘विकसित भारत 2047′ के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो ग्रामीणों को केवल मज़दूर नहीं बल्कि ‘हुनरमंद और आत्मनिर्भर’ बनाएगा।










