राम रहीम को फिर मिली ‘आज़ादी’: 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर आएगा डेरा प्रमुख; 5 साल में 15वीं बार मिली राहत

आफताब फारुकी

रोहतक/नई दिल्ली: बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर हरियाणा सरकार ने 40 दिन की पैरोल दे दी है। रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम की यह ताज़ा रिहाई पिछले साल अगस्त में मिली 40 दिन की पैरोल के कुछ ही महीनों बाद आई है।

पैरोल का ‘रिकॉर्ड’ और चुनावी कनेक्शन: आंकड़ों पर नज़र डालें तो साल 2020 के बाद से यह राम रहीम की 15वीं अस्थायी रिहाई है। अकेले साल 2025 में वह तीन बार जेल से बाहर आया था:

  • जनवरी 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 30 दिन की पैरोल।
  • अप्रैल 2025: 21 दिन की फर्लो।
  • अगस्त 2025: 40 दिन की पैरोल।

जानकारों का कहना है कि राम रहीम को मिलने वाली पैरोल का समय अक्सर चुनावों के इर्द-गिर्द होता है। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई निर्वाचन क्षेत्रों में डेरा समर्थकों की बड़ी संख्या है, जो राजनीतिक दलों के लिए वोट बैंक का बड़ा जरिया बनते हैं।

सजा का इतिहास: गुरमीत राम रहीम को 2017 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा:

  1. पत्रकार हत्याकांड: 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा मिली।
  2. रणजीत सिंह हत्याकांड: 2021 में पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी दोषी ठहराया गया था, हालांकि बाद में उच्च न्यायालय ने उसे इस मामले में बरी कर दिया था।

विरोध और नाराजगी: राम रहीम को बार-बार मिल रही राहत पर सवाल उठने लगे हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) जैसे सिख संगठनों ने इसकी कड़ी आलोचना की है। वहीं, शहीद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे ने भी बार-बार पैरोल दिए जाने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि एक खूंखार अपराधी को इस तरह बार-बार समाज में आने की अनुमति देना न्याय प्रक्रिया का मजाक उड़ाना है।

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