‘गोबर खिलाने वाली फौज’: केरल चुनाव से पहले कैथोलिक चर्च का भाजपा पर बड़ा हमला; पादरी से बर्बरता और नफरती भाषणों पर जताई कैथोलिक चर्च ने चिंता

मो0 सलीम

डेस्क: केरल में अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा झटका लगा है। ईसाई समुदाय में पैठ बनाने की भाजपा की कोशिशों के बीच, प्रभावशाली कैथोलिक चर्च ने पार्टी की तीखी आलोचना की है। चर्च के आधिकारिक मुखपत्र ‘दीपिका’ में प्रकाशित एक संपादकीय ने उत्तर भारत में ईसाइयों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

‘काउ डंग फोर्स-फीडर्स’: संपादकीय में तीखे प्रहार ‘काउ डंग फोर्स-फीडर्स’ (गोबर खिलाने वाली फौज) शीर्षक से छपे इस लेख में हाल ही में ओडिशा में हुई एक शर्मनाक घटना का जिक्र किया गया है। संपादकीय के अनुसार, एक प्रार्थना सभा के दौरान दक्षिणपंथी तत्वों ने एक पादरी को जबरन गोबर खाने पर मजबूर किया और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए वहां से चले गए।

चर्च के मुख्य आरोप:

  • केंद्र की चुप्पी: लेख में केंद्र सरकार की ‘चुप्पी’ पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति हो, तो ऐसी सांप्रदायिक घटनाओं को रोका जा सकता है।
  • धर्मांतरण विरोधी कानून: चर्च का आरोप है कि भाजपा शासित राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों ने बजरंग दल जैसे संगठनों का हौसला बढ़ाया है।
  • सांप्रदायिक मानसिकता: संपादकीय के अनुसार, “जहरीली बयानबाजी एक सांप्रदायिक मानसिकता तैयार कर रही है। जो लोग केरल में शांति का दावा करते हैं, वे अन्य राज्यों में नफरत रोकने में नाकाम रहे हैं।”

नफरती भाषणों में 41% की बढ़ोतरी चर्च ने अपने लेख में ‘इंडिया हेट लैब’ की हालिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि:

  1. अल्पसंख्यकों के खिलाफ दर्ज 88 प्रतिशत नफरत भरे भाषण भाजपा शासित राज्यों से सामने आए हैं।
  2. ईसाइयों के खिलाफ नफरत भरे भाषणों में 41 प्रतिशत का उछाल आया है (2024 में 115 से बढ़कर 2025 में 162 घटनाएं)।
  3. अमेरिकी होलोकॉस्ट संग्रहालय के अध्ययन में भारत को सामूहिक हिंसा की आशंका वाले 168 देशों में चौथा स्थान दिया गया है।

चुनावों पर असर: केरल के कैथोलिक समुदाय में उत्तर भारत की इन घटनाओं को लेकर गहरा डर और चिंता व्याप्त है। ‘द हिंदू’ से बात करते हुए चर्च अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और सम्मान के बिना राजनीतिक समर्थन संभव नहीं है। चुनाव से ठीक पहले चर्च का यह रुख भाजपा के ‘ईसाई आउटरीच प्रोग्राम’ के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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