अटलांटिक महासागर में ‘कोल्ड वॉर’ 2.0: अमेरिका जिस जहाज़ का कर रहा है पीछा, उसकी सुरक्षा में उतरा रूस; वेनेज़ुएला के तेल टैंकर पर भिड़ीं महाशक्तियाँ

शफी उस्मानी
वॉशिंगटन/मॉस्को: अटलांटिक महासागर के बीचो-बीच एक तेल टैंकर को लेकर अमेरिका और रूस के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। सीबीएस न्यूज़ (CBS News) की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने एक संदिग्ध तेल टैंकर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए अपने नौसैनिक युद्धपोतों को तैनात कर दिया है। गौरतलब है कि इसी टैंकर का पीछा अमेरिकी नौसैनिक बल पिछले कई दिनों से अटलांटिक महासागर में कर रहे हैं।

- पुराना नाम: ‘बेला 1’ (Bella 1)।
- आरोप: इस जहाज़ पर ईरानी तेल ढोने और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप है।
- पहचान में बदलाव: पिछले महीने अमेरिकी कोस्ट गार्ड की कार्रवाई से बचने के लिए जहाज़ ने अपना नाम बदला और अपना झंडा गयाना से बदलकर रूसी जहाज़ के रूप में कर लिया।
ट्रंप की ‘नाकेबंदी’ और मादुरो की गिरफ्तारी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने वेनेज़ुएला से आने-जाने वाले प्रतिबंधित तेल टैंकरों की ‘नाकेबंदी’ का आदेश दिया था। वेनेज़ुएला सरकार ने इसे ‘चोरी’ करार दिया है। यह तनाव और भी बढ़ गया है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने वेनेज़ुएला के पूर्व नेता निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया है। ट्रंप का आरोप है कि ये जहाज़ वेनेज़ुएला सरकार के इशारे पर अमेरिका में नशीले पदार्थ पहुँचा रहे हैं।
युद्ध जैसी स्थिति: मंगलवार को इस जहाज़ के स्कॉटलैंड और आइसलैंड के बीच होने की खबर मिली है। दिलचस्प बात यह है कि इसी क्षेत्र में अमेरिका के लगभग दस सैन्य परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर भी पहुँच चुके हैं। रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस जहाज़ की स्थिति पर ‘कड़ी नज़र’ बनाए हुए है और अपनी नौसेना के ज़रिए इसे सुरक्षा प्रदान कर रहा है।
रणनीतिक महत्व: विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह तैनाती केवल एक जहाज़ को बचाने के लिए नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए है। यदि अमेरिकी सेना जहाज़ को ज़ब्त करने की कोशिश करती है, तो रूसी नौसेना के साथ सीधे टकराव की स्थिति बन सकती है।








