संभल: पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश देने वाले जज का तबादला; सुल्तानपुर भेजे गए CJM विभांशु सुधीर, छिड़ी बहस— प्रशासनिक प्रक्रिया या दंडात्मक कार्रवाई?

आदिल अहमद
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर समेत 14 न्यायिक अधिकारियों का तबादला कर दिया है। विभांशु सुधीर को अब सुल्तानपुर में सीनियर डिवीजन का सिविल जज नियुक्त किया गया है, जबकि चंदौसी के सीनियर डिवीजन जज आदित्य सिंह संभल के नए सीजेएम होंगे। यह तबादला उस समय चर्चा में आया है जब महज 9 दिन पहले (13 जनवरी को) विभांशु सुधीर ने संभल हिंसा मामले में ऐतिहासिक आदेश सुनाया था।

- जज की टिप्पणी: अपने 11 पन्ने के आदेश में विभांशु सुधीर ने स्पष्ट कहा था कि “सरकारी ड्यूटी का हवाला देकर किसी गलत काम को सही नहीं ठहराया जा सकता। किसी इंसान पर गोली चलाना पुलिस की ड्यूटी नहीं हो सकती।”
- आदेश: कोर्ट ने पाया कि पुलिस की रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्य मेल नहीं खा रहे हैं, जिसके बाद सीओ अनुज चौधरी और 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया।
सवालों के घेरे में तबादला: जैसे ही जज के तबादले की खबर आई, वकीलों और विपक्षी दलों ने इसे ‘दबाव की राजनीति’ बताना शुरू कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील कमर आलम ने कहा कि इस फैसले से न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ था, लेकिन अब तबादले से निष्पक्ष विवेचना पर सवाल उठ सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय: “तबादला दंड नहीं है” इस विवाद पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने अलग राय रखी है। उन्होंने PNN24 News से बात करते हुए इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया:
“न्यायिक अधिकारियों का ट्रांसफर हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है, सरकार के नहीं। इसे अनुज चौधरी पर दिए गए फैसले का दंड मानना गलत है। हर राज्यकर्मी अपने करियर में दर्जनों बार ट्रांसफर से गुजरता है। राजनीतिक स्वार्थ के लिए इसे हवा देना न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है।”











