माघ मेले में ‘महासंग्राम’: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में जबरन घुसने की कोशिश; ‘योगी जिंदाबाद’ के नारों से तनाव, सुरक्षा घेरा बढ़ा

तारिक खान 

प्रयागराज: संगम नगरी में जारी माघ मेला अब आस्था के साथ-साथ भारी तनाव का केंद्र बन गया है। शनिवार रात ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर में कुछ अज्ञात युवकों द्वारा जबरन घुसने के प्रयास और नारेबाजी के बाद माहौल बेहद संवेदनशील हो गया है। इस घटना ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आधी रात को हंगामा और धक्का-मुक्की: मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात कुछ युवक शंकराचार्य के शिविर के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने लगे। जब शिष्यों ने उन्हें रोका, तो युवकों ने ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिंदाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इस दौरान शिष्यों और प्रदर्शनकारी युवकों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई।

“संत के वेश में शैतान”: प्रशासन पर गंभीर आरोप शंकराचार्य के विशेष प्रतिनिधि देवेंद्र पांडे ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

“यहाँ प्रशासन के संरक्षण में गुंडागर्दी हो रही है। संत के वेश में यहाँ शैतान घूम रहे हैं, जिनसे शंकराचार्य की जान को खतरा है। ये लोग रात में छिपकर वीडियो बनाते हैं और पकड़े जाने पर नोटिस का बहाना करते हैं।”

CCTV की निगरानी और गिरती तबीयत: सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए अब शिविर में 12 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, पिछले 6 दिनों से धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत नासाज है। शुक्रवार को उन्हें तेज बुखार था, जिसके बाद डॉक्टरों ने उनका उपचार किया। रविवार सुबह वे कुछ देर के लिए बाहर आए और समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया।

सियासी उबाल: अखिलेश यादव ने किया समर्थन इस विवाद ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य का समर्थन करते हुए कहा:

“अविमुक्तेश्वरानंद जी ने नकली सनातनियों की पोल खोल दी है। वे अपनी बात पर डटे हैं और पूरा सनातनी समाज उनके साथ है।”

विवाद की जड़: स्नान और पदवी पर सवाल यह पूरा संकट 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को शुरू हुआ था, जब पुलिस ने शंकराचार्य को पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जाने से रोक दिया था। प्रशासन का कहना है कि उन्हें पैदल जाना चाहिए, जबकि शिष्यों ने इसे ‘शंकराचार्य परंपरा’ का अपमान बताया। प्रशासन ने उन्हें अब तक दो नोटिस जारी किए हैं, जिनमें उनकी ‘शंकराचार्य’ की पदवी पर स्पष्टीकरण मांगा गया है और मेले से प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी गई है।

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