शरजील इमाम का जेल से संदेश: “हमें आंदोलन का नेतृत्व करने की सजा मिल रही है; विरोध को अपराध बताया जा रहा है”

तारिक खान
नई दिल्ली: दिल्ली दंगों की कथित ‘बड़ी साजिश’ (UAPA) के मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद शरजील इमाम की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उनके भाई मुजम्मिल इमाम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक विस्तृत बयान जारी कर बताया है कि शरजील इस फैसले को किस नजरिए से देख रहे हैं।

“उमर (खालिद) और मुझे उस आंदोलन को संगठित करने और उसका नेतृत्व करने की सजा दी जा रही है, जो हाल के भारतीय इतिहास के सबसे अहम जन आंदोलनों में से एक था। यह फैसला संगठित विरोध प्रदर्शनों को अपराध की श्रेणी में डालता है और किसी भी बाधा को आतंकी गतिविधि के रूप में देखता है।”
शरजील ने आगे कहा कि इस तरह के कानूनी फैसलों से ‘आतंकवादी गतिविधियों’ और ‘लोकतांत्रिक विरोध व असहमति’ के बीच का अंतर और भी धुंधला होता जा रहा है।
सह-अभियुक्तों की जमानत पर खुशी: भले ही शरजील को खुद राहत नहीं मिली, लेकिन उन्होंने साथ में जेल काट रहे पांच अन्य अभियुक्तों— गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद— को जमानत मिलने पर खुशी जाहिर की। हालांकि, उन्होंने इस बात की निंदा भी की कि इन लोगों को इतने लंबे समय तक बिना ट्रायल के जेल में रहकर ‘अन्याय’ झेलना पड़ा।
मां की सेहत को लेकर जताई चिंता: कानूनी लड़ाई के बीच शरजील ने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा भी साझा की। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता उनकी बुजुर्ग मां की शारीरिक और मानसिक सेहत को लेकर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंततः सच्चाई की जीत होगी और वे इस मामले में कामयाब होंगे।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं। वहीं, पांच अन्य लोगों को लंबी अवधि से जेल में बंद होने और ट्रायल की धीमी गति के आधार पर जमानत दे दी गई थी।









