वेनेज़ुएला के बाद अब ट्रंप की रडार पर क्यूबा! दी खुली चेतावनी— “देर होने से पहले समझौता कर लो, वरना भुगतना होगा अंजाम”

आफताब फारुकी
वॉशिंगटन/हवाना: वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब लैटिन अमेरिका की राजनीति में नया उबाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब क्यूबा को सीधी और सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेज़ुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद अब क्यूबा की ‘आर्थिक लाइफलाइन’ काट दी जाएगी।

“क्यूबा को अब वेनेज़ुएला से न तो तेल मिलेगा और न ही पैसा—शून्य (ZERO)! मैं उन्हें सलाह देता हूँ कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, वे (अमेरिका के साथ) एक समझौता कर लें।”
ट्रंप का तर्क है कि क्यूबा दशकों से वेनेज़ुएला के तेल और फंड पर जीवित रहा है और बदले में वहां के “तानाशाहों” को सुरक्षा सेवाएं देता रहा है। लेकिन अब वेनेज़ुएला में अमेरिकी प्रभाव बढ़ने के बाद, यह सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है।
क्यूबा के लिए क्यों है यह बड़ा संकट? क्यूबा अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 50% से अधिक वेनेज़ुएला के रियायती तेल पर निर्भर रहता है। वेनेज़ुएला में मादुरो के पतन और अमेरिकी नियंत्रण के बाद क्यूबा में ईंधन का भारी संकट पैदा हो सकता है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
अमेरिका-क्यूबा: दशकों पुरानी दुश्मनी का इतिहास: ट्रंप की यह चेतावनी कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह 66 साल पुराने संघर्ष का अगला अध्याय है:
- 1959 की क्रांति: फिदेल कास्त्रो ने अमेरिकी समर्थित बतिस्ता सरकार को उखाड़ फेंका और साम्यवादी शासन स्थापित किया।
- आर्थिक प्रतिबंध (1960): अमेरिका ने क्यूबा पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जो आज भी किसी न किसी रूप में जारी हैं।
- बे ऑफ पिग्स और मिसाइल संकट: 1961-62 में दोनों देश परमाणु युद्ध के कगार तक पहुँच गए थे।
- ठंडे और गर्म रिश्ते: ओबामा काल में रिश्ते सुधरे थे, लेकिन ट्रंप ने अपने पिछले और अब इस कार्यकाल में फिर से कड़े प्रतिबंध लगाकर क्यूबा को अलग-थलग करना शुरू कर दिया है।
क्यूबा की प्रतिक्रिया: क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कानेल ने ट्रंप का नाम लिए बिना कहा कि क्यूबा एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और वह किसी के दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने इसे 6 दशकों से जारी “अमेरिकी गला घोंटने की नीति” का हिस्सा बताया।









