‘अजब शिवपुर पुलिस, गजब जांच’: यूपी कॉलेज ट्रस्ट घोटाले में 4 साल से धूल फांक रही FIR; करोड़ों की धोखाधड़ी पर पुलिस की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी

तारिक आज़मी 

वाराणसी: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला ऐतिहासिक उदय प्रताप (यूपी) कॉलेज और हीवेट क्षत्रिय स्कूल एंडोर्समेंट ट्रस्ट से जुड़ा है, जहाँ करोड़ों रुपये के गबन के आरोपों में दर्ज FIR पर पिछले 4 साल से ‘जांच’ का पहिया एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा है। शिवपुर पुलिस की इस सुस्ती ने न्याय प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।

क्या है पूरा मामला? राजा उदय प्रताप जादौन द्वारा स्थापित इस शिक्षण संस्थान के संचालन हेतु एक ट्रस्ट (उदय प्रताप कॉलेज एंड हीवेट क्षत्रिय स्कूल एंडोर्समेंट ट्रस्ट) का निर्माण किया गया था। इस ट्रस्ट की प्रतिभूतियां (Securities) चैरिटेबल एंडोर्समेंट एक्ट के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के कोषाध्यक्ष (धर्मांद धर्मत सदन) के पास सुरक्षित हैं।

आरोप है कि इन प्रतिभूतियों पर मिलने वाला ब्याज, जो ‘सचिव, उदय प्रताप कॉलेज’ के नाम से इंडियन बैंक (तत्कालीन इलाहाबाद बैंक) की यूपी कॉलेज शाखा में आता था, उसे तत्कालीन शाखा प्रबंधक कुमार गौरव द्वारा फर्जी तरीके से, बिना किसी वैध हस्ताक्षर या आदेश के, किसी अन्य खाते में स्थानांतरित किया जा रहा था।

अदालत के आदेश पर दर्ज हुई थी FIR: ट्रस्ट के सह सचिव आनंद विजय सिंह ने जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से थक-हार कर अदालत का दरवाजा खटखटाया, तो कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 156(3) के तहत शिवपुर थाने को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद 1 सितंबर 2021 को अपराध क्रमांक 459/21 दर्ज किया गया।

4 साल, कई थानेदार… पर जांच शून्य! हैरत की बात यह है कि FIR दर्ज हुए 4 साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन शिवपुर पुलिस आज तक यह पता नहीं लगा पाई कि करोड़ों का फंड किस खाते में गया और इसके पीछे कौन-कौन शामिल हैं। वादी मुकदमा आनंद विजय सिंह ने PNN24 News को बताया:

“आज तक पुलिस ने मेरा बयान तक दर्ज नहीं किया है। बैंक मैनेजर और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तो दूर की बात है, पुलिस ने अभी तक अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में भी पेश नहीं की है।”

अदालत की फाइल ने खोला पुलिस का ‘खेल’ जब हमारे संवाददाता ने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में उक्त FIR की पत्रावली (File) का अवलोकन किया, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। 22 जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार, पुलिस की कोई भी जांच आख्या (Report) कोर्ट में दाखिल नहीं की गई है।

उठते गंभीर सवाल:

  1. क्या करोड़ों की धोखाधड़ी के इस मामले में पुलिस किसी ‘बड़े हाथ’ के दबाव में है?
  2. आखिर 4 साल में एक बार भी वादी का बयान दर्ज न करना पुलिस की किस मंशा को दर्शाता है?
  3. बैंक के दस्तावेजों और ट्रांजैक्शन की जांच करने में पुलिस को इतना समय क्यों लग रहा है?

यूपी कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़े इस वित्तीय घोटाले में पुलिस की यह ‘कछुआ चाल’ बनारस के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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