अजित पवार विमान हादसा: “विमान में ‘ईंधन बम’ था या साजिश?” रोहित पवार के सनसनीखेज आरोपों ने मचाया हड़कंप
अजित पवार विमान हादसे में विधायक रोहित पवार ने साजिश की आशंका जताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। 'ईंधन बम' से लेकर पायलट बदलने तक, जानें रोहित पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस की 10 बड़ी बातें।

आफताब फारुकी
मुंबई/बारामती: महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में हुई आकस्मिक मृत्यु का मामला एक बार फिर गरमा गया है। 10 फरवरी को अजित पवार के भतीजे और विधायक रोहित पवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस हादसे को लेकर ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन कंपनी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रोहित पवार ने सीधे तौर पर इस हादसे में ‘साजिश’ की आशंका जताई है।
“एजेंसियां सुस्त, इसलिए हमने की जांच”
रोहित पवार ने दावा किया कि सरकारी जांच एजेंसियां बेहद धीमी गति से काम कर रही थीं, जिसके कारण उन्हें और उनकी टीम को अपने स्तर पर जानकारी जुटानी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका निशाना सरकार या DGCA पर नहीं, बल्कि एयरलाइन कंपनी VSR, बुकिंग हैंडलर एरो (Aero) और पायलट सुमित कपूर पर है।
रोहित पवार के 5 सबसे गंभीर आरोप:
1. विमान में ‘ईंधन बम’ का दावा: रोहित पवार ने सबसे चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि VSR कंपनी पैसे बचाने के लिए विमान के अंदर ही डिब्बों में अतिरिक्त ईंधन भरकर ले जाती थी। उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों ने 4-5 धमाकों की आवाज सुनी। क्या अजित दादा की सीट के पास ईंधन के डिब्बे रखे थे? अगर ऐसा था, तो वह किसी चलते-फिरते बम से कम नहीं था।”
2. खराब सुरक्षा रिकॉर्ड और लाइसेंस का सच: रोहित ने दावा किया कि 2023 में भी इसी कंपनी का विमान मुंबई में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसकी रिपोर्ट दबा दी गई। उन्होंने कहा कि यूरोपियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने ‘लेवल-1’ की खामियों के कारण VSR का लाइसेंस रद्द कर दिया था, फिर भी इसे भारत में उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली?
3. आखिरी वक्त में पायलट का बदलना: हादसे वाले दिन पायलटों के नाम अचानक बदल दिए गए। पहले ईमेल में साहिल मदन और यश के नाम थे, लेकिन उड़ान के समय सुमित कपूर और शांभवी पाठक विमान उड़ा रहे थे। रोहित ने सवाल उठाया कि यह बदलाव किसके इशारे पर हुआ?
4. मेंटेनेंस और वार्निंग सिस्टम में गड़बड़ी: रोहित पवार के मुताबिक, विमान का ‘स्टॉल वार्निंग सिस्टम’ (जो गति कम होने पर चेतावनी देता है) बंद था। साथ ही, कंपनी ईंधन बचाने के चक्कर में पायलटों को खराब मौसम में भी दूसरे एयरपोर्ट पर लैंड करने से रोकती थी, ताकि डायवर्जन का अतिरिक्त खर्च (लगभग 10 लाख रुपये) न देना पड़े।
5. एटीसी रिपोर्ट में समय का अंतर: केंद्र और बारामती एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की रिपोर्ट में समय का बड़ा अंतर है। रोहित ने पूछा कि आग लगने के समय और पायलट की आखिरी आवाज के बीच जो विसंगति है, उसका सच क्या है?
एयरलाइन कंपनी (VSR) का क्या है पक्ष?
हादसे के तुरंत बाद VSR के मालिक विजय कुमार सिंह ने कहा था कि विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। उन्होंने पायलट सुमित कपूर के 16,000 घंटों के अनुभव का हवाला देते हुए हादसे की वजह ‘खराब दृश्यता’ (Low Visibility) को बताया था। हालांकि, फिलहाल कंपनी का फोन बंद आ रहा है और उन्होंने रोहित पवार के नए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
रोहित पवार ने मांग की है कि इस मामले की जांच केवल DGCA के भरोसे न छोड़ी जाए। उन्होंने अमेरिका या फ्रांस की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से इसकी जांच कराने की अपील की है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।










