हाईकोर्ट की मीडिया को दो-टूक: श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह विवाद पर ‘सनसनीखेज’ रिपोर्टिंग पड़ी भारी, तो जेल तक की हो सकती है तैयारी

तारिक खान
प्रयागराज: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद जैसे अति-संवेदनशील मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मीडिया की कार्यप्रणाली पर कड़ा एतराज जताया है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मामले से जुड़ी कार्यवाही या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, तो संबंधित मीडिया संस्थान के खिलाफ ‘अवमानना’ (Contempt of Court) की कार्यवाही तय है।

- यह मामला पूरी तरह न्यायिक विचाराधीन है।
- अप्रमाणित और भ्रामक खबरें न केवल न्याय प्रक्रिया को बाधित करती हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी बड़ा खतरा हैं।
- मीडिया केवल कोर्ट रिकॉर्ड और अधिकृत आदेशों के आधार पर ही रिपोर्टिंग करे।
पत्रकारिता या TRP की अंधी दौड़? हाईकोर्ट की यह सख्ती उन मीडिया संस्थानों के लिए एक आईना है जो टीआरपी (TRP) और वायरल कंटेंट के चक्कर में पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों को भूल चुके हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि जैसा संवेदनशील विषय किसी ‘एजेंडे’ या ‘सनसनी’ का हिस्सा नहीं हो सकता। जब देश की सबसे बड़ी अदालतों में से एक को मीडिया को अवमानना की धमकी देनी पड़े, तो यह समझ लेना चाहिए कि रिपोर्टिंग का स्तर गिर चुका है। कोर्ट रिपोर्टिंग में एक कॉमा या फुलस्टॉप की गलती भी समाज में आग लगा सकती है।
सावधानी ही समाधान है न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अफवाहों, अनुमानों और ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ के नाम पर पेश किए जाने वाले सनसनीखेज शीर्षकों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब गेंद मीडिया के पाले में है— वह जिम्मेदारी चुनता है या फिर कानूनी हथौड़ा।










