बांदा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 50 से ज्यादा मासूमों का यौन शोषण कर ‘डार्क वेब’ पर वीडियो बेचने वाले पति-पत्नी को फांसी की सजा

बांदा: मासूमों से दरिंदगी करने वाले 'शैतान' पति-पत्नी को फांसी की सजा। डार्क वेब पर 47 देशों में बेचते थे बच्चों के अश्लील वीडियो। सीबीआई की 700 पन्नों की चार्जशीट और 74 गवाहों ने दिलाई सजा।

जीशान अली

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। मासूम बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो बनाकर विदेशों में बेचने वाले पूर्व इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को अदालत ने ‘फांसी की सजा’ सुनाई है।

“मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए” फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने कठोर टिप्पणी की और आदेश दिया कि दोनों दोषियों को तब तक फंदे पर लटकाया जाए जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला माना है।

इंजीनियर की आड़ में चलता था ‘पेडोफाइल नेटवर्क’ 55 वर्षीय रामभवन, जो चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जेई (JE) के पद पर तैनात था, अपनी पत्नी दुर्गावती (50) के साथ मिलकर इस घिनौने अपराध को अंजाम देता था। निसंतान होने के कारण वे गरीब घरों के 5 से 16 साल के बच्चों को खिलौने, मोबाइल गेम और पैसों का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे।

डार्क वेब के जरिए 47 देशों में फैले थे तार सीबीआई (CBI) की जांच और अधिवक्ता कमल सिंह के अनुसार, यह जोड़ा बच्चों के साथ कुकर्म करने के दौरान उनके वीडियो और फोटो बना लेता था। इन अश्लील वीडियो को डार्क वेब के जरिए चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान सहित 47 देशों में बेचा जाता था। इंटरपोल की सूचना के बाद सीबीआई ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।

जांच के अहम बिंदु:

  • सीबीआई की चार्जशीट: 700 पन्नों की चार्जशीट में 74 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
  • डिजिटल सबूत: एक पेन ड्राइव में 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो बरामद हुए थे।
  • पीड़ितों का इलाज: दरिंदगी का शिकार हुए बच्चों का इलाज दिल्ली के एम्स (AIIMS) में कराया गया था।
  • मुआवजे की मांग: कोर्ट के अधिवक्ता ने डीएम को पत्र लिखकर पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है।

रामभवन को 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती को गवाहों पर दबाव बनाने और अपराध में बराबर की भागीदारी के लिए दोषी पाया गया। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है।

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