वर्दी वाले ‘अपराधी’? निर्दोष युवक को जाल में फंसाने वाले 33 पुलिसकर्मियों की होगी CBI जांच; आगरा के इंस्पेक्टर समेत कई बड़े नाम रडार पर

यूपी पुलिस के 33 जवानों पर गिरेगी सीबीआई की गाज! एक निर्दोष युवक को अपराधी बनाने के खेल में फंसे आगरा एएनटीएफ इंस्पेक्टर सहित कई बड़े अधिकारी। हाईकोर्ट के आदेश पर एसीएस होम ने दी संस्तुति। पढ़ें एक परिवार की तबाही और न्याय की लड़ाई।

गौरव जैन

आगरा/मथुरा: उत्तर प्रदेश पुलिस के 33 अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आने वाले दिन बेहद मुश्किल भरे होने वाले हैं। एक निर्दोष युवक को जबरन अपराधी बनाने और उसके परिवार को प्रताड़ित करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद ने इस प्रकरण की सीबीआई (CBI) जांच की संस्तुति कर दी है। इस जांच के दायरे में आगरा, फिरोजाबाद और मथुरा में तैनात कई इंस्पेक्टर और क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।

क्या था पूरा मामला? यह कहानी वर्ष 2018 की है। मथुरा के सुमित कुमार के भाई पुनीत कुमार को एसओजी (SOG) ने अवैध रूप से उठाया और दो दिनों तक ‘थर्ड डिग्री’ टॉर्चर दिया। इसके बाद पुलिस ने अपनी ‘सफलता’ दिखाने के लिए उसे चोरी और लूट के पांच फर्जी मुकदमों में जेल भेज दिया। सुमित ने हार नहीं मानी और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से गुहार लगाई, जहाँ जांच में पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया।

परिवार की तबाही की दास्तां जब सुमित ने पुलिस की इस ज्यादती के खिलाफ आवाज़ उठाई, तो आरोपी पुलिसकर्मियों ने बदले की भावना से सुमित के पूरे परिवार को निशाना बनाया:

  • सुमित और उसके भाई (जो खुद पुलिस में है) के खिलाफ फिरोजाबाद में अपहरण का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया।
  • पुलिसिया उत्पीड़न और तनाव के कारण सुमित की माता को ब्रेन हेमरेज हुआ और 2022 में उनकी मृत्यु हो गई।
  • सुमित का भाई दीपेंद्र निलंबित रहा, जिसकी बहाली बड़ी मुश्किल से 2022 में हो सकी।

जांच के घेरे में ‘दिग्गज’ हाईकोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए सीबीआई जांच का रास्ता साफ किया। जिन 33 पुलिसकर्मियों पर गाज गिरना तय है, उनमें शामिल कुछ प्रमुख नाम हैं:

  • आगरा एएनटीएफ (ANTF): इंस्पेक्टर हरवेंद्र मिश्रा और हेड कांस्टेबल वसीम।
  • जीआरपी आगरा: हेड कांस्टेबल लोकेश।
  • तत्कालीन अधिकारी: एएसपी राजेश सोनकर, सीओ आलोक दुबे, प्रीति सिंह, विजय शंकर मिश्रा, इंस्पेक्टर शिव प्रताप सिंह, नितिन कसाना और प्रदीप कुमार (वर्तमान इंस्पेक्टर फिरोजाबाद)।

यह मामला केवल एक युवक को फर्जी केस में फंसाने का नहीं है, बल्कि रक्षक के भक्षक बनने का है। सवाल यह है कि क्या इन 33 पुलिसकर्मियों को अब ‘साइड लाइन’ किया जाएगा या ये अभी भी जांच को प्रभावित करने के लिए अपने पदों पर बने रहेंगे?

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