शंकराचार्य विवाद: मथुरा के फलाहारी बाबा ने की CBI जांच की मांग; पीएम मोदी को लिखा पत्र— “जांच न हुई तो लूंगा इच्छा मृत्यु”
शंकराचार्य विवाद में नया मोड़! मथुरा के दिनेश फलाहारी महाराज ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, की CBI जांच की मांग। बोले— "हिस्ट्रीशीटर आशुतोष ब्रह्मचारी ने रचा षड्यंत्र, प्रेमानंद महाराज को भी कर चुका है टारगेट।"

गौरव जैन
मथुरा (PNN24 News): ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज POCSO मुकदमे को लेकर संतों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने इस पूरे प्रकरण को सनातन धर्म के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जांच नहीं हुई तो वे इच्छा मृत्यु का मार्ग चुनेंगे।

- शामली का हिस्ट्रीशीटर: आशुतोष खुद शामली थाने का हिस्ट्रीशीटर बदमाश है और उसका भाई गैंगस्टर है। उसके खिलाफ गौकशी जैसे दर्जनों संगीन मामले दर्ज हैं।
- प्रेमानंद महाराज को भी बनाया था निशाना: फलाहारी बाबा ने आरोप लगाया कि आशुतोष ने इससे पहले वृंदावन के सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज पर भी धन उगाही के उद्देश्य से झूठे इल्जाम लगाए थे।
- Z+ सुरक्षा के लिए नाटक: उन्होंने यह भी दावा किया कि आशुतोष ने सुरक्षा पाने के लिए खुद पर हमले का नाटक किया और पाकिस्तान से फर्जी धमकी भरे कॉल भी करवाए।
शंकराचार्य को फंसाने का षड्यंत्र फलाहारी महाराज का कहना है कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने केवल ‘फेमस’ होने या मोटी रकम ऐंठने के लिए नाबालिग बच्चों को प्रलोभन देकर शंकराचार्य के खिलाफ पोक्सो एक्ट का इस्तेमाल किया है। उन्होंने पत्र में लिखा:
“शंकराचार्य जी निर्दोष हैं। एक अपराधी द्वारा सनातन धर्म की सर्वोच्च संस्था की छवि खराब की जा रही है। इस पूरे प्रकरण और आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास की सीबीआई जांच होना अनिवार्य है।”
प्रधानमंत्री को बताया सनातनी गौरव पीएम मोदी को सनातनी हिंदुओं का गौरव बताते हुए फलाहारी बाबा ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस साजिश का पर्दाफाश करेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस की जांच पर भरोसा करना मुश्किल है क्योंकि एक हिस्ट्रीशीटर के इशारे पर इतनी बड़ी संस्था को निशाना बनाया गया है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज मुकदमे ने अब ‘संत बनाम संत’ की लड़ाई का रूप ले लिया है। एक तरफ यौन शोषण के संगीन आरोप हैं, तो दूसरी तरफ शिकायतकर्ता के संदिग्ध चरित्र और पुराने रिकॉर्ड को लेकर बड़े संतों की लामबंदी। सीबीआई जांच की यह मांग अब इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ दे सकती है।










