भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ तो घटा पर ‘रूसी तेल’ पर फंसा पेंच? ट्रंप के दावे और पीयूष गोयल की चुप्पी के बीच छिड़ा सियासी घमासान
भारत-अमेरिका के बीच 'अंतरिम ट्रेड डील' फाइनल...! टैरिफ 50% से घटकर 18% हुआ, लेकिन क्या भारत ने रूसी तेल न खरीदने की शर्त मानी? पीयूष गोयल के जवाब और विपक्ष के 'सरेंडर' वाले आरोपों पर PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

फारुख हुसैन
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘ट्रुथ सोशल’ पर की गई घोषणा के बाद, भारत सरकार ने भी अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) के ढांचे पर मुहर लगा दी है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, लेकिन इसके बदले भारत को जो शर्तें माननी पड़ी हैं, उन्होंने देश की सियासत को गरमा दिया है।

क्या मिला और क्या दिया? डील की बड़ी बातें:
- भारत की तरफ से: अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद (ऊर्जा, विमान, तकनीकी उत्पाद, कोकिंग कोल) खरीदेगा। साथ ही कई अमेरिकी कृषि उत्पादों (सोयाबीन तेल, वाइन, सूखे मेवे) पर टैरिफ खत्म या कम करेगा।
- अमेरिका की तरफ से: भारतीय कपड़ा, चमड़ा, जूते और मशीनरी उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% किया गया। जेनेरिक दवाओं और आभूषणों पर से शुल्क हटाने का आश्वासन मिला है।
विपक्ष का हमला: “थाली में परोसकर ट्रंप को सौंप दिया देश” कांग्रेस ने इस समझौते को ‘आर्थिक आत्मसमर्पण’ करार दिया है।
- पवन खेड़ा: “मोदी जी ने किसानों और भारत के हितों को ट्रंप की थाली में परोस दिया है। भारत अब अमेरिका का डंपिंग ग्राउंड बन जाएगा।”
- पी. चिदंबरम: “यह कोई व्यापक समझौता नहीं, केवल एक ‘ढांचा’ है जो पूरी तरह अमेरिका के पक्ष में झुका हुआ है।”
- सुप्रिया श्रीनेत: “मोदी सरकार ने ट्रंप के उन्हीं दावों की पुष्टि की है जिसे उन्होंने चार दिन पहले कहा था।”
एक्सपर्ट्स की चिंता: MSP और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि डेयरी और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने के अमेरिकी दबाव से भारत के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और सार्वजनिक खरीद प्रणाली पर बुरा असर पड़ सकता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, कृषि उत्पादों पर कटौती संवेदनशील है क्योंकि इससे 70 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी है।
क्या भारत रूस जैसे पुराने रणनीतिक साझेदार को अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए छोड़ देगा? यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो क्या ट्रंप फिर से टैरिफ बढ़ाने का ‘चाबुक’ चलाएंगे? यह ट्रेड डील जितनी आर्थिक है, उससे कहीं अधिक कूटनीतिक अग्निपरीक्षा है।










