राज्यसभा में कमल हासन का ‘विश्वरूपम’: चुनाव आयोग को दी कड़ी चेतावनी; बोले— “बिहार वाली बीमारी तमिलनाडु न फैले, लोकतंत्र लोगों को रौंदने के लिए नहीं है”

राज्यसभा में कमल हासन की पहली गर्जना! 'बिहार वाली बीमारी' को लेकर चुनाव आयोग को चेताया। कहा- "वोटर लिस्ट से नाम काटना लोकतंत्र की हत्या है।" तमिलनाडु चुनाव से पहले 1 करोड़ 'जीवित मृतकों' की आशंका पर सदन में मचा हड़कंप।

आदिल अहमद 

नई दिल्ली/चेन्नई: अभिनेता से राजनेता बने और मक्कल निधि मय्यम (MNM) के संस्थापक कमल हासन ने बुधवार को राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलते हुए हासन ने ‘सत्यापन’ (SIR) प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।

“बिहार कई ज़िंदा मुर्दों की भूमि बन गया है” कमल हासन ने बिहार की मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा:

“बिहार आज कई ‘ज़िंदा मुर्दों’ की भूमि बन गया है, जहाँ मतदाताओं को कागजों पर मृत घोषित कर उनके नाम लिस्ट से काट दिए गए। हम नहीं चाहते कि यह बीमारी पूरे देश में फैले। चुनाव आयोग इस ‘बिहार वाली बीमारी’ के प्रसार को सुविधाजनक बना रहा है।”

तमिलनाडु चुनाव और 1 करोड़ ‘मृतक’ का डर इस साल होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए हासन ने बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने अंदेशा जताया कि अगर यही प्रक्रिया जारी रही, तो तमिलनाडु में कागजों पर करीब 1 करोड़ जीवित लोग ‘मृतक’ घोषित किए जा सकते हैं। उन्होंने मांग की कि जिन लोगों के नाम स्पेलिंग या पते की मामूली गलतियों की वजह से काटे गए हैं, उन्हें तुरंत मतदान का अधिकार वापस मिले।

लोकतंत्र की जीत पर बड़ा दर्शन कमल हासन ने सदन में लोकतंत्र की परिभाषा समझाते हुए कहा कि चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं है। उन्होंने कहा:

  • “लोकतंत्र में कोई स्थायी विजय प्राप्त नहीं करता। यह विशाल रथ (Juggernaut) मतभेदों को रौंदते हुए आगे बढ़ सकता है, लेकिन इसे लोगों को नहीं रौंदना चाहिए।”
  • “कोई भी सरकार अमर या स्थायी नहीं है। इतिहास गवाह है कि किसी ने स्थायित्व हासिल नहीं किया है और यह सरकार भी उसी अलिखित कानून के अधीन है।”

सिनेमा से संसद तक का सफर अपने भाषण में हासन ने अपनी व्यक्तिगत यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने परमकुडी के अपने बचपन और तमिल इतिहास से जुड़ाव को याद करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई को अपना आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि अन्नादुरई ने ही हमें अपनी भाषा, संस्कृति और अधिकारों पर होने वाले किसी भी आक्रमण का सामना करना सिखाया है।

विपक्ष का मिला साथ कमल हासन के इस आक्रामक और तार्किक भाषण का विपक्ष ने मेजें थपथपाकर स्वागत किया। उनके बगल में बैठे राजद सांसद मनोज झा ने हाथ मिलाकर उन्हें शाबाशी दी, जो उत्तर भारत और दक्षिण भारत के राजनीतिक मुद्दों के जुड़ाव को दर्शाता है।

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