सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में पैदल चलीं और दर्शक दीर्घा में बैठीं… जब ‘ममता’ ने खुद पैरवी कर हिला दिया चुनाव आयोग; बोलीं— “क्या लोकतंत्र को बुलडोज किया जाएगा?”
सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की 'दहाड़'! व्यक्तिगत रूप से पेश होकर चुनाव आयोग को बताया 'व्हाट्सएप आयोग'। कहा- "केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा, दरवाजे के पीछे न्याय रो रहा है।" कोर्ट ने चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
नई दिल्ली: एक तरफ राज्यसभा में कमल हासन ‘बिहार वाली बीमारी’ पर केंद्र को घेर रहे थे, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपनी रिट याचिका पर बहस करने पहुंच गईं। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में ममता ने चुनाव आयोग (ECI) पर बंगाल को निशाना बनाने और मतदाताओं को “बुलडोज” करने का गंभीर आरोप लगाया।

“व्हाट्सएप आयोग” और “मरते बीएलओ”: ममता के तीखे प्रहार ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए उसे “व्हाट्सएप आयोग” करार दिया। उनके संबोधन के मुख्य अंश इस प्रकार थे:
- चुनिंदा निशाना: “बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? असम या पूर्वोत्तर क्यों नहीं? 24 साल बाद इतनी जल्दी क्या थी कि जो काम 2 साल में होता है, उसे 3 महीने में निपटाया जा रहा है?”
- इंसानी जान की कीमत: उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दबाव के कारण 150 से ज्यादा लोगों की जान गई, जिनमें कई बीएलओ (BLO) शामिल हैं, जिन्होंने सुसाइड नोट में अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
- बंगाली बनाम बाहरी: ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों से ‘माइक्रो-ऑब्जर्वर’ मंगाकर बंगाल के लोगों को कुचला जा रहा है।
नामों की स्पेलिंग और अनुवाद का फेर बहस के दौरान जब बंगाली उच्चारण (जैसे दत्ता और अन्य नामों) की बात आई, तो ममता ने खुद जजों को समझाया कि कैसे बंगाली से अंग्रेजी अनुवाद के कारण लाखों मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “बेटियां ससुराल चली गईं या किसी ने घर बदला, तो पूरे परिवार का नाम काट दिया गया। दरवाजे के पीछे न्याय रो रहा है, सर!”
सुप्रीम कोर्ट का रुख और आयोग को नोटिस मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ममता की दलीलों के बाद चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। सीजेआई ने आयोग को निर्देश दिया कि:
- नामों की स्पेलिंग जैसी मामूली गलतियों पर नोटिस देते समय अधिकारी अधिक संवेदनशीलता बरतें।
- मामले की अगली सुनवाई अब 9 फरवरी को होगी।
हालांकि, आधार कार्ड को शामिल करने की मांग पर सीजेआई ने कहा कि एसआईआर (SIR) की संवैधानिक वैधता पर कोर्ट पहले ही फैसला सुरक्षित रख चुका है, इसलिए वे इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।










