“चाहे FIR हो या प्रिविलेज मोशन, किसानों के लिए लड़ूंगा”: अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर सीधा वार

नई दिल्ली: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल गांधी का बड़ा हमला! मोदी सरकार पर किसानों को 'बेचने' और देश की खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप। बोले— "FIR हो या प्रिविलेज मोशन, मैं किसानों के लिए लड़ूंगा।"

आफताब फारुकी

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस समझौते के जरिए केंद्र सरकार ने भारतीय किसानों के हितों और देश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) के साथ बड़ा समझौता किया है।

अन्नदाताओं को अमेरिका के हाथों बेच दिया” राहुल गांधी ने वीडियो संदेश में बेहद सख्त लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के कृषि बाजार का दरवाजा विदेशी शक्तियों के लिए खोल दिया है। उन्होंने विशेष रूप से कई फसलों का जिक्र करते हुए कहा:

“नरेंद्र मोदी जी ने हमारी फूड सिक्योरिटी और हमारे किसानों को धोखा दिया है। अमेरिका के साथ समझौता कर उन्होंने कपास, सोया, सेब और फल के किसानों को बेच दिया है। यह सच्चाई प्रधानमंत्री भी जानते हैं और मैं भी जानता हूं।”

ट्रेड डील को बताया ‘किसान-विरोधी’ राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ऐसी किसी भी डील का विरोध करेगी जो किसानों की रोजी-रोटी छीने। उन्होंने कहा कि जो भी समझौता देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करेगा, वह सीधे तौर पर किसान-विरोधी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अन्नदाताओं के हितों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रिविलेज मोशन और कार्रवाई पर बेबाक जवाब इस समझौते के विवरण और संसद में उठने वाले संभावित विरोधों के बीच राहुल गांधी ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा:

“मुझ पर एफ़आईआर हो, मुक़दमा दर्ज हो या प्रिविलेज मोशन (विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव) लाया जाए, मैं पीछे नहीं हटूंगा। मैं किसानों के हक के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूंगा।”

क्या है विवाद की जड़? गौरतलब है कि अमेरिका के साथ हुई इस डील में भारत ने कई अमेरिकी कृषि उत्पादों (जैसे सोयाबीन तेल, वाइन और सूखे मेवे) पर टैरिफ कम करने का फैसला किया है। विपक्ष का आरोप है कि इससे विदेशी उत्पाद भारतीय बाजारों में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा और भारत विदेशी आयात पर निर्भर हो जाएगा।

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