देहरादून में कांग्रेस का ‘हल्ला-बोल’: राजभवन घेराव के दौरान पुलिस से तीखी झड़प; हरीश रावत बोले— “भ्रष्टाचार और अपराध के ख़िलाफ़ निर्णायक जंग शुरू”

देहरादून: उत्तराखंड में कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन! बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और महिला अपराध के ख़िलाफ़ राजभवन घेराव। कुमारी सैलजा और हरीश रावत के नेतृत्व में हज़ारों कार्यकर्ताओं ने भरी हुंकार।

तारिक खान

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सोमवार को कांग्रेस के भारी शक्ति प्रदर्शन का गवाह बनी। प्रदेश में बढ़ते अपराध, बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने ‘राजभवन घेराव’ का आह्वान किया, जिसमें प्रदेशभर से हज़ारों की संख्या में कार्यकर्ता परेड ग्राउंड में जुटे। इस कूच के दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की और तीखी झड़प भी देखने को मिली।

तीन लेयर की बैरिकेडिंग और पुलिस से भिड़ंत राजभवन की ओर कूच कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। तीन लेयर्स में की गई बैरिकेडिंग को जब कार्यकर्ताओं ने लांघने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रैली से पहले ही प्रशासन ने शहर में लगे पार्टी के पोस्टर और बैनर हटवा दिए, जो सरकार की घबराहट को दर्शाता है।

दिग्गजों ने भरी हुंकार: सरकार पर तीखे प्रहार कूच का नेतृत्व कर रही प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा और अलका लांबा के साथ उत्तराखंड कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता सड़कों पर उतरे।

  • हरीश रावत: पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे नीतियों के ख़िलाफ़ “हल्ला-बोल” क़रार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जंगली जानवरों के हमलों से गांव खाली हो रहे हैं और महिलाएं असुरक्षित हैं।
  • गणेश गोदियाल: प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा का ‘भय और भ्रष्टाचार मुक्त’ शासन का वादा पूरी तरह खोखला साबित हुआ है।
  • यशपाल आर्य व हरक सिंह रावत: दोनों नेताओं ने कानून-व्यवस्था के चरमराने पर गंभीर सवाल उठाए।

90 दिन के अभियान का आगाज़ कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रशासन द्वारा बैनर हटवाए जाने को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन महज़ एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह सरकार के ख़िलाफ़ कांग्रेस के 90 दिनों के राष्ट्रव्यापी और प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत है।

कांग्रेस नेताओं ने दो-टूक कहा कि जब तक बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार ठोस जवाब नहीं देती, उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।

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