दालमंडी में ‘पोस्टर वॉर’ से मचा हड़कंप! ‘गद्दार’ लिखे वायरल स्टीकर पर शानू मोबाइल का करारा पलटवार— बोले, “मजबूरी में बेचा भवन, संघर्ष से पीछे नहीं हटा”

तारिक आज़मी
वाराणसी: दालमंडी गली चौड़ीकरण अभियान इन दिनों न केवल प्रशासनिक ध्वस्तीकरण, बल्कि आपसी ‘सियासी रंजिश’ का अखाड़ा भी बन गया है। लगभग दो दर्जन भवनों के अधिग्रहण और उनके तोड़े जाने की प्रक्रिया के बीच सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्टर (स्टीकर) ने आग में घी डालने का काम किया है। इस पोस्टर में दालमंडी के हक की लड़ाई लड़ने वाले प्रमुख चेहरों को ‘गद्दार’ करार दिया गया है।

इस पोस्टर ने स्थानीय स्तर पर काफी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग इसे महज़ एक खुराफात के बजाय किसी की छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश के रूप में देख रहे हैं।
शानू मोबाइल ने तोड़ी चुप्पी: “मजबूरी को गद्दारी न कहें” दालमंडी चौड़ीकरण के खिलाफ सबसे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट से ‘स्टे’ (Stay) लेने वाले शानू मोबाइल इस पोस्टर से खासे आहत दिखे। PNN24 News से खास बातचीत में उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा:
“दालमंडी की जनता जानती है कि इस अभियान के खिलाफ पहली आवाज़ मैंने उठाई थी और हाईकोर्ट से स्टे लेकर आया था। जहाँ तक भवन बेचने की बात है, वह मेरी मजबूरी थी क्योंकि उस भवन पर मेरा मालिकाना हक तो था लेकिन कब्जा नहीं था। मेरी तीन और दुकानें इसी चौड़ीकरण की ज़द में आ रही हैं, जिन्हें मैंने नहीं बेचा है। मेरी लोकप्रियता से जलने वाले कुछ लोग अब इस तरह के पोस्टर वायरल कर रहे हैं।”
संघर्ष का दावा: “कल भी साथ था, आज भी हूँ” शानू मोबाइल ने साफ़ किया कि वे इन खुराफातियों का जवाब अपने काम और संघर्ष से देंगे। उन्होंने कहा कि दालमंडी के व्यापारियों और निवासियों में जागरूकता फैलाने का काम उन्होंने ही शुरू किया था और वे आगे भी उनके हक के लिए खड़े रहेंगे।
क्षेत्रीय हलचल: इस पोस्टर विवाद ने दालमंडी के माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। पार्षद इन्द्रेश कुमार और अन्य लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल होने से समर्थकों में भी नाराजगी है। व्यापारियों का एक वर्ग इसे एकता तोड़ने की कोशिश मान रहा है, ताकि चौड़ीकरण अभियान में कोई बाधा न आए।











