MLC चुनाव: ‘दागी’ चेहरा और ‘अवैध’ होर्डिंग; क्या कानून से ऊपर है महादेव पीजी कालेज के अजय सिंह का भौकाल?

वाराणसी MLC चुनाव: हत्या के आरोपी अजय सिंह ने भाजपा सिंबल का अवैध उपयोग कर शहर में होर्डिंग लगाई। विज्ञापन उपनियमों की धज्जियां उड़ाने और कोर्ट के विचाराधीन मामलों के बीच 'स्वघोषित' प्रत्याशी की पोल खोलती रिपोर्ट।

मो0 सलीम

वाराणसी। लोकतंत्र में चुनाव लड़ना सबका अधिकार है, लेकिन क्या किसी राजनीतिक दल के अधिकृत सिंबल को बिना अनुमति के अपनी ‘ब्रांडिंग’ के लिए इस्तेमाल करना अपराध नहीं है? वाराणसी में इन दिनों महादेव पीजी कॉलेज के मालिक अजय सिंह ने शहर को होर्डिंग्स से पाट दिया है। खुद को ‘भाजपा स्नातक प्रत्याशी’ बताने वाले अजय सिंह के इस दांव ने न केवल नगर निगम, बल्कि खुद भाजपा के भीतर भी खलबली मचा दी है।

🚫 विज्ञापन उपनियमों की धज्जियां: धारा 326-A का खुला उल्लंघन

वाराणसी नगर निगम के विज्ञापन उपनियम 2021 और उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 326-A के तहत सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना पूर्व अनुमति और शुल्क चुकाए पोस्टर या होर्डिंग लगाना दंडनीय अपराध है।

  • नियम क्या है: हर होर्डिंग पर नगर निगम का ‘परमिशन नंबर’ और ‘एजेंसी का नाम’ होना अनिवार्य है।
  • अजय सिंह का तरीका: संदहा से लेकर शहर के भीतरी इलाकों तक लगी होर्डिंग्स पर न तो कोई परमिशन नंबर है और न ही निगम की रसीद। लेकिन पोस्टर पर ‘कमल का फूल’ होने के कारण नगर निगम के अधिकारी धारा 327 के तहत कार्रवाई करने से भी कतरा रहे हैं, जिसमें अवैध पोस्टर लगाने पर जुर्माने और जेल का प्रावधान है।

⚖️ ‘हत्या के आरोपी’ का राजनीतिक ढाल

अजय सिंह का नाम विभूति हत्याकांड में मुख्य अभियुक्त के तौर पर दर्ज है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जो उनके गले की हड्डी बन सकता है। कानून के जानकारों के अनुसार:

  • वादी मुकदमा और गवाहों पर दबाव बनाने के लिए उन पर 4 फर्जी FIR दर्ज कराई गई हैं, जो IPC की धारा 182 और 211 (झूठी सूचना देना और फंसाना) के तहत जांच का विषय हो सकती हैं।
  • हत्या के मुकदमे के बीच इस तरह की ‘शक्ति प्रदर्शन’ वाली होर्डिंग्स गवाहों को डराने का एक माध्यम भी हो सकती हैं।

🎓 कॉलेज विवाद: क्या MGKVP की चुप्पी ‘मिलीभगत’ है?

अजय सिंह के महादेव पीजी कॉलेज की संबद्धता (Affiliation) भी अब रडार पर है।

  1. मालिकाना हक: जिस जमीन पर कॉलेज बना है, उसकी रजिस्ट्री और खतौनी में अजय सिंह का नाम न होना UGC के संबद्धता नियमों का सीधा उल्लंघन है।
  2. संबद्धता रद्दीकरण: नियमों के मुताबिक, अगर कॉलेज की जमीन विवादित है या मानक पूरे नहीं हैं, तो विश्वविद्यालय को संबद्धता तुरंत रद्द कर देनी चाहिए। मगर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

🚩 भाजपा के लिए ‘धर्मसंकट’

एक तरफ भाजपा ‘अपराध मुक्त’ राजनीति की बात करती है, और दूसरी तरफ एक हत्या का आरोपी पार्टी का सिंबल लगाकर खुद को प्रत्याशी घोषित कर रहा है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि अजय सिंह ने ‘नीचे से प्रथम’ स्थान हासिल किया है, लेकिन एक माननीय विधायक का वरदहस्त उन्हें यह दुस्साहस करने की ताकत दे रहा है।

बड़ा सवाल: क्या प्रशासन आदर्श आचार संहिता के इंतजार में है या फिर किसी ‘खास’ दबाव में इन अवैध होर्डिंग्स को देखने के बाद भी अपनी आंखें मूंदे बैठा है?

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