‘असम चुनाव से पहले हिमंत का बड़ा बयान: “घुसपैठ कोई इमारत नहीं जिसकी डेडलाइन दे सकें; जब तक बांग्लादेश रहेगा, यह चुनौती बनी रहेगी!”‘

असम चुनाव 2026: "जब तक बांग्लादेश है, घुसपैठिए आते रहेंगे"—सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान। घुसपैठ के मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का दिया कड़ा जवाब। 9 अप्रैल को मतदान से पहले असम में गरमाया 'इमिग्रेशन' का मुद्दा। PNN24 की विशेष चुनावी रिपोर्ट।

आदिल अहमद 

PNN24 News: असम में 9 अप्रैल, 2026 को होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घुसपैठ के मुद्दे पर एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यह समस्या भारत और बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति से जुड़ी है, जिसे किसी निश्चित समय सीमा (Deadline) में बांधना नामुमकिन है।

1. “जब तक बांग्लादेश, तब तक घुसपैठ”

चुनाव प्रचार के दौरान जब एक रिपोर्टर ने मुख्यमंत्री से पूछा कि 10 साल की सरकार के बावजूद घुसपैठ का मुद्दा कब तक बना रहेगा, तो हिमंत ने दो-टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा, “यह कोई बिल्डिंग बनाने जैसा काम नहीं है कि मैं आपको इसकी डेडलाइन दे दूँ। जब तक दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश रहेगा, तब तक लोग आने की कोशिश करेंगे और हमें उनसे जूझना ही होगा।”

2. असम चुनाव 2026 का मुख्य एजेंडा

मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब राज्य की सभी 126 सीटों पर एक ही चरण में मतदान होना है।

  • बीजेपी का रुख: मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बीजेपी ‘मिशन क्लीन अप’ और घुसपैठियों को ‘पुश-बैक’ करने की नीति को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है।
  • विपक्ष का पलटवार: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार की ‘विफलता’ बताते हुए सवाल कर रहे हैं कि इतने सालों में सीमा पूरी तरह सुरक्षित क्यों नहीं हुई?

3. सुरक्षा और सतर्कता

हिमंत बिस्वा सरमा ने तर्क दिया कि घुसपैठ रोकना एक निरंतर चलने वाली प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश पड़ोसी हैं, इसलिए सीमा पर निरंतर निगरानी और सतर्कता ही एकमात्र समाधान है।

📊 असम विधानसभा चुनाव 2026: एक नज़र में (Election Snapshot)

विवरण जानकारी
मतदान की तिथि 9 अप्रैल, 2026 (एक चरण)
कुल विधानसभा सीटें 126
मुख्य मुद्दा घुसपैठ, NRC, विकास और पहचान की राजनीति
मतगणना (Result) 4 मई, 2026
मुख्य मुकाबला NDA (BJP+) बनाम असोम संमिलित मोर्चा (कांग्रेस+)

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