महायुद्ध में अमेरिका का ‘इको’ खत्म! रियाद में CIA स्टेशन पर ईरानी मिसाइल प्रहार; अपने नागरिकों को लावारिस छोड़ भाग रहा है सुपरपावर?
सुपरपावर का सरेंडर? रियाद में CIA स्टेशन पर ईरानी मिसाइल प्रहार। अमेरिकी दूतावास बंद, नागरिकों को छोड़ भागने की तैयारी। क्या खत्म हो गया अमेरिका का 'भौकाल'? अब दुनिया में बढ़ रही है ईरानी हथियारों की धूम।

मो0 सलीम
PNN24 News: मध्य-पूर्व का युद्ध अब उस मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ दुनिया का तथाकथित ‘सुपरपावर’ यानी अमेरिका, बेबस और लाचार नज़र आ रहा है। देर रात सऊदी अरब की राजधानी रियाद से आई खबर ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है। फॉक न्यूज़ (Fox News) की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने रियाद स्थित CIA (सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी) के स्टेशन पर सीधा मिसाइल हमला किया है।
1. CIA स्टेशन पर हमला: ‘भौकाल’ पर सीधी चोट
CIA, जिसका नाम सुनकर दुनिया भर के देश सहम जाते थे, आज उसी के सुरक्षित ठिकानों पर ईरानी मिसाइलें बरस रही हैं। रियाद में CIA स्टेशन को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि ईरान का खुफिया और मिसाइल तंत्र अब अमेरिका से दो कदम आगे है।
अगर कोई देश अमेरिका की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी के स्टेशन को मलबे में तब्दील कर सकता है, तो अमेरिका को अब नैतिकता और सुरक्षा के आधार पर यह युद्ध बंद कर घर लौट जाना चाहिए।
2. नागरिकों को ‘लावारिस’ छोड़ता अमेरिका
सुपरपावर होने का पहला दावा होता है— दुनिया के किसी भी कोने में अपने नागरिक की सुरक्षा करना। लेकिन इस युद्ध में अमेरिका का असली चेहरा सामने आ गया है:
- दूतावासों पर ताले: रियाद, कुवैत और बहरीन में दूतावास बंद कर दिए गए हैं।
- अजीबोगरीब एडवाइजरी: अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों से साफ़ कह दिया है कि “हम आपकी रक्षा नहीं कर सकते, आप जहाँ कहीं भी हों, खुद वहां से निकलें।” सवाल उठता है कि जो देश अपने नागरिकों की जान की गारंटी नहीं ले सकता, क्या उसे ‘सुपरपावर’ कहलाने का हक है?
3. बाज़ार में ईरानी हथियारों की ‘धूम’
एक तरफ अमेरिका के ‘पैट्रियट’ और ‘आयरन डोम’ जैसे डिफेंस सिस्टम ईरानी मिसाइलों को रोकने में नाकाम हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान की मिसाइलों और ड्रोनों ने अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवा लिया है।
- बढ़ती मांग: सूत्रों के अनुसार, कई एशियाई और अफ्रीकी देशों ने ईरान की मिसाइल तकनीक में दिलचस्पी दिखाई है।
- कम लागत, सटीक वार: ईरान के ड्रोनों ने साबित कर दिया है कि करोड़ों डॉलर के अमेरिकी सिस्टम को कुछ हज़ार डॉलर के ‘कामिकेज़ ड्रोन’ से ध्वस्त किया जा सकता है।
4. क्या यह अमेरिका के पतन की शुरुआत है?
रियाद में CIA स्टेशन पर हमला केवल एक सैन्य घटना नहीं है, यह एक ‘सिम्बॉलिक’ अंत है उस डर का जो दशकों से अमेरिका ने दुनिया में कायम कर रखा था। ईरान ने यह संदेश दे दिया है कि अब उसकी ज़मीन पर हमला होगा, तो जवाबी कार्रवाई वॉशिंगटन के सबसे गुप्त ठिकानों तक पहुँचेगी।










