‘ख़ामेनेई शहीद हैं, इज़राइल वॉर क्रिमिनल’: महबूबा मुफ़्ती और असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान; बोले— “शांति वार्ता के बीच हमला अमेरिका का विश्वासघात”
ईरान के सुप्रीम लीडर ख़ामेनेई की शहादत पर भारत में सियासी उबाल। महबूबा मुफ़्ती ने ख़ामेनेई को बताया 'शहीद', ओवैसी ने हमले को कहा 'कायराना'। नेतन्याहू को 'वॉर क्रिमिनल' करार देते हुए अमेरिका पर साधा निशाना।

प्रदीप कुमार
नई दिल्ली/श्रीनगर (PNN24 News): ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की अमेरिकी-इज़राइली हमले में मौत के बाद भारत के प्रमुख राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती और एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है।
महबूबा मुफ़्ती: “नेतन्याहू एक वॉर क्रिमिनल हैं”
मीडिया से बातचीत करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने ख़ामेनेई को ‘शहीद’ का दर्जा दिया। उन्होंने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर सीधा हमला बोलते हुए कहा:
“पूरी दुनिया देख रही है कि किस तरह से ‘वॉर क्रिमिनल’ नेतन्याहू अमेरिका का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका प्रभाव बहुत दूर तक जाएगा। ईरान की जनता मज़बूत है और सालों से ‘शैतानी ताक़तों’ का मुक़ाबला कर रही है। मैं दुआ करती हूँ कि इस युद्ध में ईरान की जीत हो।”
मुफ़्ती ने भारत सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत एक उभरती हुई ताक़त है और अमन बहाली (Peacekeeping) में हमारी बड़ी भूमिका हो सकती थी, लेकिन मौजूदा सरकार की ‘एकतरफ़ा’ नीतियों ने हमें महज़ एक ‘आम देश’ बनाकर रख दिया है।
असदुद्दीन ओवैसी: “शांति वार्ता के बीच हमला कायराना”
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस हमले को अमानवीय और कूटनीतिक धोखा बताया। उन्होंने कहा:
“सम्मानित नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई की हत्या उस वक्त की गई जब जिनेवा में शांति वार्ता चल रही थी। यह हमला कायराना है। इसके बाद ईरान चुप नहीं बैठने वाला। अमेरिका और इज़राइल ने अंतरराष्ट्रीय मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है।”
भारत में इन बड़े नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि ख़ामेनेई की शहादत का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। कश्मीर से लेकर हैदराबाद तक इस घटना को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। मुफ़्ती और ओवैसी के ये बयान वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका और इज़राइल-अमेरिका गठबंधन के प्रति एक बड़े वर्ग की नाराज़गी को दर्शाते हैं।










