‘संसद में मेरी आवाज़ दबाई जा रही है’: राहुल गांधी ने फिर दोहराया ‘न बोलने देने’ का आरोप; रविशंकर प्रसाद का तंज— “नियमों का पालन करना सीखें नेता प्रतिपक्ष”

लोकसभा में भारी हंगामा: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आरोप— "अडानी और एपस्टीन पर सवाल पूछने पर मुझे चुप करा दिया गया।" बीजेपी का पलटवार, रविशंकर प्रसाद बोले— "विपक्ष के नेता को सदन के नियम सीखने की ज़रूरत है।"

मो0 सलीम

नई दिल्ली (PNN24 News): बजट सत्र के दूसरे हिस्से में बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज़ को कुचला जा रहा है और उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने नहीं दिया जा रहा है।

1. राहुल गांधी के तीखे प्रहार: ‘अडानी और एपस्टीन पर सवाल भारी’

राहुल गांधी ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि जब भी विपक्ष बुनियादी सवाल पूछता है, तो उन्हें रोक दिया जाता है। उन्होंने कहा:

  • सवालों की फेहरिस्त: “पिछली बार मैंने प्रधानमंत्री के विदेशी समझौतों, पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे, एपस्टीन और अडानी का मुद्दा उठाया था, लेकिन मुझे चुप करा दिया गया।”
  • ऐतिहासिक दावा: उन्होंने दावा किया कि भारतीय संसदीय इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि विपक्ष के नेता को बहस के दौरान बोलने से रोका गया हो।
  • अवरोध: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जैसे ही वे प्रधानमंत्री से जुड़े ‘समझौतों’ पर सवाल उठाते हैं, वैसे ही सदन की कार्यवाही में बाधा डाली जाती है।

2. बीजेपी का पलटवार: ‘आचरण और नियमों की नसीहत’

बीजेपी की ओर से वरिष्ठ सांसद रविशंकर प्रसाद ने मोर्चा संभाला और राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

  • आचरण पर सवाल: रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सदन में नेता प्रतिपक्ष का आचरण गरिमापूर्ण होना चाहिए, जो वर्तमान में दिखाई नहीं दे रहा है।
  • नियमों का पाठ: उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “के.सी. वेणुगोपाल जी को चाहिए कि वे नेता प्रतिपक्ष को सदन के नियम पढ़ाएं। संसदीय मर्यादा का पालन करना हर सदस्य की जिम्मेदारी है।”

3. सदन में गतिरोध जारी

राहुल गांधी के बयानों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ज़ोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। विपक्षी सांसद ‘लोकतंत्र बचाओ’ के नारे लगा रहे थे, जबकि सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी से माफी की मांग की। हंगामे को देखते हुए स्पीकर को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

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