‘तेल के गढ़’ पर फिर हमला: रास तानूरा रिफ़ाइनरी पर ईरान का ड्रोन वार; सऊदी अरब ने हमले को किया नाकाम, दुनिया भर में तेल संकट गहराया
सऊदी अरब की रास तानूरा रिफ़ाइनरी पर फिर मंडराया खतरा! बुधवार को ईरान के एक और ड्रोन हमले को सऊदी सेना ने किया नाकाम। 48 घंटे में दूसरा हमला— तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन पर संकट।

शफी उस्मानी
PNN24 News): मध्य-पूर्व में जारी महायुद्ध की आंच अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले तेल ठिकानों तक पहुँच गई है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार (4 मार्च, 2026) को पुष्टि की है कि ईरान ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रास तानूरा (Ras Tanura) तेल रिफ़ाइनरी को निशाना बनाने की कोशिश की।
1. 48 घंटे में दूसरा बड़ा हमला
सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने ‘एक्स’ (X) पर जारी एक बयान में बताया कि बुधवार को एक आत्मघाती ड्रोन ने रिफ़ाइनरी की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसे सऊदी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense) ने समय रहते नष्ट कर दिया।
- नुकसान: शुरुआती जांच के मुताबिक, इस हमले से रिफ़ाइनरी को कोई भौतिक नुकसान नहीं पहुँचा है और तेल उत्पादन सुचारू रूप से जारी है।
- पिछला हमला: गौरतलब है कि सोमवार (2 मार्च) को भी इसी रिफ़ाइनरी पर दो ड्रोनों से हमला हुआ था, जिसके मलबे से परिसर में ‘सीमित आग’ लग गई थी और एहतियातन रिफ़ाइनरी को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था।
2. रास तानूरा: क्यों है यह ईरान का मुख्य निशाना?
रास तानूरा केवल एक रिफ़ाइनरी नहीं है, बल्कि यह दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात टर्मिनलों में से एक है।
- क्षमता: यहाँ प्रतिदिन 5,50,000 बैरल तेल साफ़ करने की क्षमता है।
- रणनीतिक महत्व: सऊदी अरब का अधिकांश निर्यात यहीं से होकर गुज़रता है। यदि इस पर सफल हमला होता है, तो वैश्विक बाज़ार से लाखों बैरल तेल गायब हो सकता है, जिससे कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
3. सऊदी अरब का रुख: “आत्मरक्षा का अधिकार”
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बार-बार हो रहे इन हमलों का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को अस्थिर करना है। सऊदी अरब ने चेतावनी दी है कि वह अपनी संपत्तियों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों के बाद सऊदी अरब अब खुले तौर पर अमेरिका और इज़राइल के साथ सैन्य गठबंधन में शामिल हो सकता है।
4. बाज़ार की प्रतिक्रिया
बुधवार को जैसे ही हमले की खबर आई, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 2% की और तेज़ी देखी गई। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि खाड़ी में तनाव बढ़ने से माल ढुलाई (Freight) और बीमा की लागत भी बढ़ गई है।










