‘होर्मुज़ पर “हंटर”: ट्रंप का ईरान को सोमवार तक का अल्टीमेटम— “रास्ता खोलो वरना भुगतो गंभीर नतीजे”; ओमान की मध्यस्थता से जगी उम्मीद, पर दुनिया में तेल की कीमतों ने मचाया हाहाकार!’
दुनिया पर 'ऊर्जा महासंकट' का साया: होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी से वैश्विक अर्थव्यवस्था पस्त। ओमान और ईरान के बीच समुद्री रास्ता खोलने पर गुप्त वार्ता, लेकिन ट्रंप का अल्टीमेटम— "सोमवार तक रास्ता नहीं खुला, तो परिणाम भुगतो"। क्या टल पाएगा युद्ध या छिड़ेगी महाजंग? PNN24 की विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News: वैश्विक ऊर्जा व्यापार की जीवन रेखा कहे जाने वाले होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर जारी तनाव ने पूरी दुनिया को आर्थिक मंदी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ईरान द्वारा इस समुद्री रास्ते की ‘अघोषित नाकेबंदी’ के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। इस बीच, कूटनीतिक गलियारों से लेकर युद्ध के मैदान तक हलचल तेज़ हो गई है।
1. ओमान की ‘शांति पहल’: क्या निकलेगा समाधान?
ओमान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि शनिवार को ईरान और ओमान के उप विदेश मंत्रियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।
- विकल्पों पर चर्चा: इस बैठक में दोनों देशों के विशेषज्ञों ने समुद्री रास्ते को सुचारु रूप से खोलने के लिए कई ‘प्रस्तावों और संभावित समाधानों’ पर मंथन किया।
- नया प्रोटोकॉल: सूत्रों के मुताबिक, ईरान एक नए ‘नेविगेशन रिजीम’ का ड्राफ्ट तैयार कर रहा है, जिसे लेकर ओमान के साथ बातचीत जारी है।
2. ट्रंप का ‘डेडलाइन’ वार: सोमवार तक का समय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कूटनीतिक कोशिश के बीच अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा है:
- अंतिम चेतावनी: यदि सोमवार तक होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई (Operation Epic Fury) के दायरे को और बढ़ा सकता है।
- गंभीर परिणाम: ट्रंप के इस रुख से साफ़ है कि अमेरिका अब और इंतज़ार करने के मूड में नहीं है।
3. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ‘स्ट्रोक’
होर्मुज़ की नाकेबंदी का सीधा असर भारत सहित दुनिया के उन देशों पर पड़ रहा है जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं।
- कीमतों में आग: कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से रिफाइनरियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
- महँगाई का खतरा: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी कुछ दिन और जारी रही, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीज़ल और अन्य ज़रूरी वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगेंगे।










