‘प्रधानमंत्री के भाषण पर जयराम रमेश का “वार”: कहा— “40 मिनट बोले पीएम, लेकिन परिसीमन के असली खतरे पर साधी चुप्पी”; विपक्ष को भरोसे में न लेने का लगाया आरोप!’

प्रधानमंत्री मोदी के लोकसभा संबोधन पर कांग्रेस का तीखा पलटवार! जयराम रमेश ने परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को घेरा, कहा— "पीएम ने 40 मिनट बात की पर मुख्य मुद्दे पर रहे मौन।" विपक्ष ने राज्यों से परामर्श न करने और सर्वदलीय बैठक की मांग ठुकराने का लगाया आरोप। PNN24 की विशेष राजनैतिक रिपोर्ट।

आदिल अहमद

नई दिल्ली (PNN24 News): महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बुलाए गए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में खींचतान बढ़ती जा रही है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के तुरंत बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट साझा कर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।

1. मुख्य मुद्दे से “किनारा” करने का आरोप

जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के भाषण को ‘असामान्य’ बताते हुए कहा कि पीएम ने 40 मिनट के संबोधन में लगभग हर विषय पर बात की, लेकिन उस ‘परिसीमन’ के मुद्दे पर मौन रहे जो इस सत्र का सबसे बड़ा दांव है। रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने परिसीमन को लेकर उठाई गई किसी भी चिंता का जवाब नहीं दिया है।

2. “दो दलीय विश्वास” पर सवाल

प्रधानमंत्री द्वारा सर्वसम्मति और सहयोग की अपील पर कटाक्ष करते हुए जयराम रमेश ने लिखा, “सरकार ने विश्वास प्रेरित करने के बजाय इसके ठीक उलट काम किया है। प्रधानमंत्री का यह दावा कि उन्होंने हर दल से बात की है, सच्चाई से परे है।” उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के नेता ने 29 अप्रैल को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया।

3. राज्यों की अनदेखी और लोकसभा संरचना का खतरा

कांग्रेस नेता ने एक बड़ा आरोप यह भी लगाया कि सरकार लोकसभा और विधानसभाओं के परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, लेकिन इसके लिए किसी भी राज्य सरकार से औपचारिक या अनौपचारिक परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार यह स्पष्ट नहीं कर रही है कि परिसीमन कैसे होगा, जिससे लोकसभा की वर्तमान संरचना को बड़े पैमाने पर बदलने का खतरा पैदा हो गया है।

📊 विपक्ष की मुख्य आपत्तियाँ: एक नज़र में (Opposition’s Objections)

मुद्दा जयराम रमेश / विपक्ष का दावा
परिसीमन प्रधानमंत्री ने इस पर उठाई गई चिंताओं का जवाब नहीं दिया।
संवाद सर्वदलीय बैठक की मांग ठुकराई गई, राज्यों से बात नहीं की गई।
पारदर्शिता कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि परिसीमन का तरीका क्या होगा।
संरचना लोकसभा की संरचना में बड़े और असंतुलित बदलाव का खतरा।

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