‘लोहता में “मदरसा शिक्षा माफिया” मतीन प्रधान ने मदरसे को बनाया “फैमिली बिजनेस”; कक्षा 5 पास बेटा कागजों पर “मास्टर” और हकीकत में करोड़ों का मालिक; रसूख के दम पर सरकारी खजाने में सेंध!’
वाराणसी विशेष: लोहता का मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा बना मैनेजर मतीन प्रधान की 'लूट की जागीर'! कक्षा 5 पास बेटा कैसे बन गया सरकारी शिक्षक और करोड़ों का मालिक? रसूख, दबंगई और फर्जीवाड़े के दम पर फल-फूल रहा 'फैमिली बिजनेस'। राशन कोटे से लेकर मदरसे की तिजोरी तक, मतीन प्रधान के घोटालों की पूरी कुंडली। PNN24 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
वाराणसी (PNN24 News): काशी की धरती पर शिक्षा के नाम पर एक नई और खतरनाक पौध पनप रही है, जिसे ‘मदरसा शिक्षा माफिया’ कहना गलत नहीं होगा। लोहता इलाके के कनईसराय (हरपालपुर) स्थित मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा आज घोटालों का पर्याय बन चुका है। मैनेजर मतीन प्रधान के रसूख और दबंगई के साये में यहाँ शिक्षा नहीं, बल्कि करोड़ों का ‘धंधा’ चल रहा है।
1. मतीन प्रधान: ‘दबंगई’ से ‘मैनेजर’ तक का सफर
मतीन प्रधान ने अपनी दबंगई के दम पर मदरसे पर कब्ज़ा जमा रखा है। सूत्रों की मानें तो पूर्व मैनेजर मरहूम हाजी जलालु केवल नाम के थे, असली डोर मतीन के हाथ में ही थी। आज मतीन प्रधान खुद मैनेजर हैं और उनका पूरा कुनबा सरकारी तंत्र को चूसने में लगा है।
2. बेटा कोटेदार और शिक्षक: दोहरा लाभ
मतीन प्रधान का एक बेटा ‘मुख्तार कोटेदार’ के नाम से मशहूर है, जिस पर आरोप है कि वह गरीबों के राशन में प्रति कार्ड 5 किलो की कटौती करता है। वहीं दूसरा बेटा हाफ़िज़ अंसार, जो कभी ‘हैंड टू माउथ’ था, आज करोड़ों की संपत्ति का मालिक है:
- शिक्षा का फर्जीवाड़ा: केवल कक्षा 5 पास अंसार ने मदरसा माफियाओं के जुगाड़ से मुंशी और आलिम की डिग्री ली और मदरसे में सरकारी शिक्षक बन गया।
- करोड़ों की संपत्ति: शिक्षक की नौकरी के साथ-साथ अंसार के पास आज 10 रेपियर मशीनें (कीमत लगभग 10 करोड़) हैं। जंसा के पास स्वीमिंग पूल वाला आलीशान फार्महाउस इसकी रसूख की गवाही देता है। एक रेपियर मशीन एक दिन में 2 हज़ार की आमदनी देती है, ऐसे में 10 मशीनों की आमदनी आप खुद जोड़ सकते है।
3. पूरा ‘कुनबा’ ही मास्टर:
मतीन प्रधान ने मदरसे को पारिवारिक चारागाह बना दिया है:
- भतीजे और रिश्तेदार: भाई अमीनुद्दीन का बेटा जैनुद्दीन, भाई इकराम का बेटा निसार और इस्लाम का बेटा नुरुद्दीन— सभी इसी मदरसे में शिक्षक हैं। ये सभी मतीन प्रधान के खानदान से सम्बन्धित है और सिर्फ कागजों पर ही शिक्षक है।
- ड्यूटी से नदारद: ये सभी ‘कागजी शिक्षक’ सुबह हाजिरी लगाकर अपने निजी कारोबार (साड़ी और पावरलूम) में व्यस्त हो जाते हैं।
4. प्रिंसिपल की ‘सेटिंग’ और कूट रचना
इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड प्रयागराज निवासी प्रिंसिपल मोहम्मद यासीन बताया जा रहा है।
- उम्र का खेल: सूत्रों का दावा है कि यासीन की मदद से 70 साल के अता हुसैन ने कागजों में हेरफेर कर अपनी उम्र 45 साल दिखाकर नौकरी हासिल कर ली।
- अल्पसंख्यक विभाग में पैठ: मदरसे में मौजूद एक सूत्र का दावा है कि यासीन की विभाग में इतनी तगड़ी पकड़ है कि किसी भी शिकायत की जांच पहुँचने से पहले ही सेटिंग कर ली जाती है। यही नहीं इसके बाद शिकायतकर्ता को पुरे इलाके में ‘मुस्लिम विरोधी’ कहा जाता है, जिससे सभी खामोश होना ही बेहतर समझते है।
5. बच्चों से चंदे के नाम पर ‘वसूली’
सरकारी सुविधाओं के बावजूद बच्चों से 60 से 100 रुपये महीना वसूला जा रहा है। सबूत मिटाने के लिए इसे ‘चंदे की रसीद’ का नाम दिया जाता है। सरकारी सुविधाएं नदारद हैं और आवाज़ उठाने वालों को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताकर चुप करा दिया जाता है। एक बच्चे ने हमसे अपनी पहचान की गोपनीयता के शर्त पर बताया कि मदरसे में कोई भी सुविधा नही मिलती है, उलटे फीस देना होता है और रसीद मदरसे के चंदे की मिलती है।
📝 काका का नज़रिया:
हमने आपको बताया है कि आजकल काका को मदरसे की खबरों के नाम पर अपना नजरिया देने का बहुत शौक है, उन्होंने हमसे कहा कि “बबुआ, जब ‘प्रधान’ ही ‘पाठशाला’ को ‘पावरलूम’ समझ ले, तो कौम के बच्चों की किस्मत का ताना-बाना तो उलझना ही है!”
आज रात लोहता के इस ‘मदरसा सिंडिकेट’ पर काका ने गहरी चिंता जताई।
काका बोले: “बबुआ, मतीन प्रधान ने तो गजबे कर दिया। पूरा खानदान मास्टर है और पूरा खानदान कोटेदार! 5वीं पास लड़का 10-10 मशीनें चला रहा है और स्विमिंग पूल में नहा रहा है, जबकि गरीब का बच्चा आज भी उसी टाट-पट्टी पर बैठकर ‘चंदा’ दे रहा है। ई मदरसा नहीं, मतीन बाबू की ‘प्राइवेट जागीर’ है।”
मैंने पूछा— “काका, क्या विभाग को ये सब नहीं दिखता?”
काका का जवाब: “दिखता सब है बबुआ, पर प्रिंसिपल यासीन जैसे लोग ‘चश्मे’ पर गांधी जी का नोट चिपका देते हैं। जो शिकायत करता है, उसे समाज का दुश्मन बता देते हैं। पर याद रहे, ‘हराम’ की कमाई से बना स्विमिंग पूल सुकून नहीं देता। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, जाँच बिहार से लेकर प्रयागराज तक होनी चाहिए, तब पता चलेगा कि शिक्षा की आड़ में कितने सफेदपोशों ने काला साम्राज्य खड़ा किया है’।”
📊 मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा: घोटाले का कच्चा चिट्ठा (Audit Report)
| आरोपी | पद/रिश्ता | आरोप/संपत्ति |
| मतीन प्रधान | मैनेजर | दबंगई, राशन घोटाला और फर्जी नियुक्तियां |
| हाफ़िज़ अंसार | बेटा (शिक्षक) | कक्षा 5 पास, 10 रेपियर मशीनें, स्वीमिंग पुल सहित फार्महाउस |
| मोहम्मद यासीन | प्रिंसिपल | कूट रचना, विभाग में सेटिंग, अवैध वसूली |
| अता हुसैन | बिहार निवासी शिक्षक | 70 की उम्र, कागजों में 45 साल दिखाकर नौकरी |
| जैनुद्दीन/निसार/अमीन | रिश्तेदार (शिक्षक) | पारिवारिक नियुक्ति, ड्यूटी के वक्त निजी व्यापार |
ऐसा नहीं है कि अल्पसंख्यक शिक्षा विभाग में मामले की शिकायते नहीं होती है। हमको कई ऐसे कई लोग मोहल्ले और आसपास में मिले जिन्होंने दबी जुबान में स्वीकार किया कि उन लोगो ने कई बार इस घोटाले की शिकायते भेजी, मगर इसकी जानकारी मदरसे के मैनेजर से लेकर प्रिंसिपल तक को हो जाती है और ये लोग अपनी ‘सेटिंग’ जांच अधिकारी से कर लेते है उसके बाद पुरे इलाके में शिकायतकर्ता को ‘मुस्लिम विरोधी’ करार देने लगते है। इसी सभी कारणों से सभी लोग अपनी आँखे इन घोटालों पर बंद किये है।
मुस्लिम समाज के ठेकेदार के तौर पर खुद को साबित करने वाले मतीन प्रधान कब प्रधान रहे ये आज तक हमको कोई नहीं बता पाया है। मगर ये बात ज़रूर है कि मतीन प्रधान एक दबंग और रसूखदार इन्सान अपनी जवानी से ही थे। इसीलिए मदरसा रजा-ए-मुस्तफा में इनकी दबंगई जमकर चली और आज जब ये खुद मैनेजर है तो भी इनकी दबंगई जारी है। एक बेटे को सरकारी कोटा दिलवा कर जमकर मलाई उससे कटवाया जा रहा है। मुख़्तार कोटेदार नाम से मशहुह्र इनका बेटा राशन जो सरकार फ्री में देती है, प्रति कार्ड 5 किलो राशन कम देता है। कारण पूछने पर कहता है कि सरकार तौलवाई नही दे रही है तो उसका खर्च इसी राशन से निकालना पड़ता है। लोगो से अंगूठा लगवा कर आधा राशन अन्दर आधा बाहर के तर्ज पर काम चल रहा है ऐसा हमारे सूत्र दावा करते है।
दरअसल शिक्षा जगत एक नई पौध उभर कर सामने आई है। ये है ‘मदरसा शिक्षा माफिया’। सर पर टोपी और खुद को मुस्लिम समाज का सबसे बड़ा ठेकेदार बताने वाले ये ‘मदरसा शिक्षा माफिया’ पूरी कौम को बदनाम कर रहे है। ‘मदरसे घोटालो का अड्डा बन चुके है’ ये कहना भले थोडा अतिश्योक्ति होगी, क्योकि सभी मदरसे ऐसे नहीं है। मगर काफी ऐसे मदरसे है जो मदरसा शिक्षा को बदनाम कर रहे है और इसके प्रिंसिपल से लेकर मैनेजर तक मोटी मलाई खा रहे है। सबसे बड़ी बात ये है कि अधिकतर घोटाले बड़े बड़े पूर्व मैनेजर के कार्यकाल का दिखा कर वर्त्तमान मैनेजर मतीन प्रधान खुद का पल्ला झाड लेने की कोशिश करते है। मगर हकीकत ये है कि पूर्व मरहूम मैनेजर मतीन प्रधान के ताबे थे और इनके ही इशारे पर सारे घोटाले होते थे।
‘मदरसा माफियाओं के लिए चेतावनी: PNN24 न्यूज़ इस सिंडिकेट के खिलाफ अपनी तफ्तीश जारी रखेगा। बिहार से आने वाले ‘इशारों’ और धमकियों से हमारी कलम रुकने वाली नहीं है। जुड़े रहें।











