‘उत्तराखंड में “मदरसा बोर्ड” पर आर-पार: मौलाना शाहबुद्दीन बोले— “मदरसों को बदनाम करना ऐतिहासिक भूल”; सीएम धामी ने कहा — “मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उठाया कड़ा कदम”!’
बड़ी खबर: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म करने पर मौलाना शाहबुद्दीन रजवी का बड़ा हमला, कहा— "यह ऐतिहासिक गलती है।" सीएम धामी बोले— "विभाजनकारी सोच रोकने के लिए जरूरी था फैसला।" 1 जुलाई 2026 से लागू होगा नया समान पाठ्यक्रम। मदरसों की आजादी की लड़ाई और आज के 'जिहाद' वाले बयान पर छिड़ी रार। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

मो0 कुमेल
बरेली/देहरादून (PNN24 News): उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के क्रांतिकारी और विवादास्पद फैसले ने उत्तर भारत की सियासत में उबाल ला दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे एक ‘ऐतिहासिक गलती’ करार दिया है। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता लाने वाला कदम बताया है।
1. मौलाना शाहबुद्दीन का तर्क: “इतिहास को न भूलें”
बरेली से जारी बयान में मौलाना शाहबुद्दीन ने कहा कि मदरसों ने देश की आजादी के लिए बड़ी कुर्बानियां दी हैं।
- योगदान: उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता संग्राम में उलेमाओं और छात्रों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
- बदनामी का आरोप: मौलाना ने सीएम धामी के ‘जिहादी सोच’ वाले बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा शिक्षण संस्थानों को इस तरह बदनाम करना ‘असंवैधानिक’ और ‘गैर-नैतिक’ है।
- चिंता: उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों और मदरसों पर हो रही कार्रवाई से समाज में असुरक्षा का माहौल है।
2. सीएम धामी का विजन: “1 जुलाई से नई शुरुआत”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने फैसले का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य में अब ‘विभाजनकारी सोच’ की कोई जगह नहीं होगी।
- समान पाठ्यक्रम: 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
- मुख्यधारा की शिक्षा: सरकार का तर्क है कि मदरसा बोर्ड को खत्म करने का उद्देश्य बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा (साइंस, मैथ, कंप्यूटर) से जोड़ना है।
- अवैध संस्थानों पर प्रहार: सीएम ने कहा कि राज्य में अवैध रूप से चल रहे मदरसों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे।
📊 नजरिया अपना अपना मगर दो टुक बात ये ये है कि
मुख्यधारा से जोड़ना तो सोने पर सुहागा है। पर सवाल ई है कि क्या बोर्ड खत्म किए बिना पाठ्यक्रम नहीं सुधारा जा सकता था? 1 जुलाई से क्या बदलेगा, ई तो वक्त बताएगा, पर अभी तो सिर्फ दिलों में दूरियां बढ़ रही हैं। धामी साहब ‘समानता’ की बात कर रहे हैं और मौलाना ‘अस्तित्व’ की। काशी की गंगा-जमुनी तहजीब से हम तो यही कहेंगे कि शिक्षा का मकसद इंसान बनाना होना चाहिए, उसे किसी खास चश्मे से देखना समाज के ताने-बाने को कमज़ोर ही करेगा। ‘ऐतिहासिक गलती’ है या ‘क्रांतिकारी कदम’, इसका फैसला तो उन बच्चों का भविष्य करेगा जो इन कमरों में पढ़ेंगे।












