’12 साल की फरारी, बदला नाम और हुलिया; पैरोल जंप कर फिल्मों और सीरियल्स का “साइड एक्टर” बना कातिल वकील हेमंत मोदी गिरफ्तार; मकान मालिक को सरकारी पहचान पत्र न देना पड़ा भारी!’

अहमदाबाद: 12 साल पहले हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटकर पैरोल पर फरार हुआ वकील हेमंत मोदी मुंबई जाकर बन गया बड़ा एक्टर। कई फिल्मों, वेब सीरीज और गुजराती धारावाहिक 'मोटी बानी नानी बहू' में काम करने वाले इस शातिर अपराधी की गिरफ्तारी की पूरी इनसाइड स्टोरी, सिर्फ PNN24 पर।

ईदुल अमीन

PNN24 News: कानून की कमियों का फायदा उठाकर पुलिस की आंखों में धूल झोंकना और फिर मुंबई की चकाचौंध में अपनी पहचान बदलकर फिल्मों और वेब सीरीज का हिस्सा बन जाना— यह कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं बल्कि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार किए गए शातिर अपराधी हेमंत मोदी की वास्तविक कहानी है। 12 साल पहले हत्या के एक सनसनीखेज मामले में उम्रकैद की सजा मिलने के बाद पैरोल पर फरार हुआ यह कातिल वकील, मुंबई का एक जाना-माना साइड एक्टर बन चुका था, जिसे आखिरकार पुलिस ने जाल बिछाकर धर दबोचा है।

🔪 2005 का वो खूनी विवाद और वकील से कातिल बनने का सफर

मामले के तथ्यों के अनुसार, अपराध जगत में आने से पहले हेमंत मोदी अहमदाबाद के नरोदा स्थित सैजपुर बोघा की ‘दासकी चॉल’ में रहा करता था। वह पेशे से एक वकील था, लेकिन उसका स्वभाव बेहद विवादित और दबंग था।

  • स्थानीय नागरिक मनीष पटेल ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि साल 2005 के झगड़े से पहले हेमंत मोदी चॉल के सभी लोगों को कानूनी नोटिस देकर डराता और दबाता रहता था। उसने अपनी पत्नी को भी तलाक दे दिया था।
  • 12 जून, 2005 को पड़ोसियों के साथ हुए एक मामूली झगड़े ने खूनी रूप ले लिया। हेमंत ने अपने भाई और दोस्तों के साथ मिलकर अपने पड़ोसी के दोस्त नरेंद्र ताम्बले उर्फ नन्नो की बेरहमी से हत्या कर दी।
  • चूंकि हेमंत खुद एक वकील था, इसलिए उसने पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अपने साथ के 7 अन्य आरोपियों का केस खुद लड़ा। मगर कानून के हाथ लंबे थे; वर्ष 2008 में तीन साल तक चले कड़े मुकदमे के बाद अदालत ने हेमंत मोदी समेत सभी सातों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए उम्रकैद (Life Imprisonment) की सख्त सजा सुना दी।

🧠 जेल मैनुअल का खेल और मेहसाणा जेल से पैरोल पर फरारी

वकील होने के कारण हेमंत जेल मैनुअल और कानूनी दांव-पेंचों से बखूबी वाकिफ था। साबरमती जेल (अहमदाबाद) में सजा काटने के दौरान उसने तत्कालीन जेलर केशव कुमार के खिलाफ याचिका दायर कर दी और खुद को डिप्रेशन (अवसाद) का मरीज घोषित करवा दिया। इस याचिका के आधार पर उसे अहमदाबाद से मेहसाणा जेल स्थानांतरित कर दिया गया। अदालत के फैसले के छह साल बाद, मेहसाणा जेल में बंद हेमंत को गुजरात उच्च न्यायालय से 30 दिन की पैरोल मिली। लेकिन जैसे ही वह जेल की चहारदीवारी से बाहर आया, वह वापस नहीं लौटा और कानून को ठेंगा दिखाकर फरार हो गया।

🎬 हेमंत मोदी से ‘स्वप्निल मोदी’ बनने और मुंबई का सफर

पैरोल जंप करने के बाद हेमंत कुछ समय तक अलग-अलग जगहों पर छिपा रहा और फिर अपनी पहचान पूरी तरह छिपाने के लिए सपनों की नगरी मुंबई चला गया। वहाँ उसने एक्टिंग को अपना नया ढाल बनाया:

  • उसने अपना असली नाम बदलकर ‘स्वप्निल मोदी’ रख लिया ताकि स्क्रीन पर कभी असली नाम आने से पोल न खुल जाए।
  • उसने अपना हेयरस्टाइल, बात करने का तरीका और पूरा हुलिया बदल डाला।
  • धीरे-धीरे उसने मुंबई के थिएटर्स (नाटकों) में काम करना शुरू किया और जल्द ही उसे बॉलीवुड और साउथ की फिल्मों, टीवी सीरियल्स तथा वेब सीरीज में साइड रोल्स मिलने लगे। पहचान न होने के कारण उसका हौसला बढ़ता गया और वह गुजराती सिनेमा में भी सक्रिय हो गया।
  • जाने-माने सिनेमैटोग्राफर रसिक त्रिवेदी ने इस संबंध में बताया, “यह स्वप्निल मेरे पास भी फिल्म में काम मांगने आया था, लेकिन मुझे उसका अभिनय अच्छा नहीं लगा और उसने बदतमीजी भी की थी, इसलिए मैंने उसे काम नहीं दिया। वह खुद को मुंबई का साइड एक्टर बताता था।”

🔍 कोट इलाके का सैलून, सामाजिक कार्यकर्ता का शक और गिरफ्तारी

किस्मत का चक्र घूमा और हेमंत एक गुजराती सीरियल ‘मोटी बानी नानी बहू’ में रोल मिलने के कारण वापस अहमदाबाद लौट आया। उसने पुलिस से बचने के लिए अहमदाबाद के कोट इलाके में एक मकान किराए पर लिया।

  • वह अक्सर क्षेत्र के लोगों से कहता था कि वह मुंबई का एक बहुत बड़ा एक्टर है। कोट इलाके के एक सैलून कर्मचारी इकबाल ने बताया, “जब वह मेरी दुकान पर आता था, तो अपनी महंगी क्रीम और हेयर जेल खुद साथ लाता था। वह कहता था कि वह अपनी नई फिल्म के लिए कोट इलाके के माहौल को समझने यहाँ रह रहा है।”
  • पकड़े जाने की मुख्य वजह: हेमंत जब इस किराए के मकान में रह रहा था, तो उसने स्थानीय नियमों के तहत अपना सरकारी पहचान पत्र (Aadhaar Card) और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने मकान मालिक को देने से साफ इनकार कर दिया। पहचान पत्र छुपाने की इसी जिद ने स्थानीय क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता के मन में गहरा संदेह पैदा कर दिया।
  • इसी बीच, क्षेत्र के ही एक अन्य वकील ने उस सामाजिक कार्यकर्ता को बताया कि इस तथाकथित एक्टर का चेहरा सालों पहले जेल से फरार हुए एक कातिल वकील हेमंत मोदी से काफी मिलता-जुलता है। सामाजिक कार्यकर्ता ने बिना देर किए इसकी खुफिया सूचना अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को दे दी।

🎭 ‘शानदार एक्टिंग’ के बीच शरीर के निशानों ने खोली पोल

सूचना मिलते ही अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर पीएम धाकड़ा के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने सीरियल की शूटिंग लोकेशन और उसके घर के आसपास जाल बिछाया। एक दिन जब वह शूटिंग पूरी करके घर लौट रहा था, पुलिस ने उसे दबोच लिया।

इंस्पेक्टर पीएम धाकड़ा ने इस नाटकीय गिरफ्तारी के बारे में बताते हुए कहा, “जब हम सीरियल ‘मोटी बानी नानी बहू’ के सेट और उसके आवास के पास पहुंचे, तो एक अभिनेता के रूप में उसका अभिनय और आत्मविश्वास इतना शानदार था कि उसे पहचानना बेहद मुश्किल हो रहा था। वह पुलिस के सामने भी अभिनय कर रहा था। लेकिन हमारे पास 12 साल पुराने रिकॉर्ड थे। जब हमने उसकी गिरफ्तारी के समय दर्ज किए गए शरीर के पुराने निशानों (Body Marks) का मिलान किया, तो वे हूबहू मिल गए। इसके बाद जब उससे कड़ी और मनोवैज्ञानिक पूछताछ की गई, तो उसने आखिरकार घुटने टेक दिए और कबूल किया कि वही उम्रकैद की सजा पाया हुआ कातिल हेमंत मोदी है।”

फिलहाल, 12 साल बाद कानून का यह भगोड़ा और एक्टिंग की आड़ में छिपा कातिल एक बार फिर सलाखों के पीछे पहुंच चुका है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की इस मुस्तैदी और एक सजग सामाजिक कार्यकर्ता की सतर्कता की पूरे शहर में सराहना हो रही है।

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