‘कमाल मौला मस्जिद-धार भोजशाला’ पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परिसर को माना “सरस्वती मंदिर”, नमाज़ की अनुमति रद्द; मुस्लिम समाज को वैकल्पिक ज़मीन देने का आदेश…!’
धार भोजशाला विवाद पर इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परिसर को घोषित किया वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार की नमाज की अनुमति रद्द। मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन देने का निर्देश। भाजपा और कांग्रेस विधायकों की तीखी प्रतिक्रिया। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
इंदौर/धार (PNN24 News): मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने 15 मई 2026 को एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर यह परिसर मूल रूप से वाग्देवी (माता सरस्वती) का मंदिर ही है। इसी के साथ कोर्ट ने परिसर में नमाज पढ़ने के अधिकार को समाप्त करते हुए मुस्लिम समाज के लिए अलग से वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने का आदेश प्रशासन को दिया है।
1. कोर्ट का फैसला और नए दिशा-निर्देश
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एएसआई की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट और दोनों पक्षों की लंबी दलीलों को सुनने के बाद निम्नलिखित मुख्य बिंदु तय किए हैं:
- 2003 की व्यवस्था रद्द: कोर्ट ने एएसआई के वर्ष 2003 के उस पुराने आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की अनुमति मिली हुई थी।
- हिंदू पक्ष को पूर्ण अधिकार: अब इस ऐतिहासिक परिसर में हिंदू समाज को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने का पूर्ण अधिकार होगा।
- वैकल्पिक स्थान का प्रावधान: अदालत ने कहा कि मुस्लिम समाज को नमाज अदा करने के लिए धार क्षेत्र में ही प्रशासन द्वारा कोई अन्य वैकल्पिक भूमि मुहैया कराई जा सकती है।
- लंदन से प्रतिमा लाने का निर्देश: न्यायालय ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी (सरस्वती) की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने के प्रयासों पर विचार किया जाए।
2. “सत्य और सनातन की जीत” — भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा
हाई कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत करते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसे ‘सत्य और सनातन की बड़ी विजय’ करार दिया। उन्होंने कहा:
- सत्य को कभी पराजित नहीं किया जा सकता, आज यह ऐतिहासिक रूप से साबित हो गया है।
- मुगलों ने भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों पर गहरे प्रहार किए, वेदों को जलाया और मंदिरों को तोड़ा, लेकिन हिंदू समाज अपनी आस्था की रक्षा के लिए सदियों तक निरंतर संघर्ष करता रहा।
- उन्होंने उम्मीद जताई कि मुस्लिम समाज भी अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करते हुए सत्य को स्वीकार करेगा, जिससे देश में आपसी भाईचारे और सौहार्द का एक नया संदेश जाएगा।
3. “हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे” — कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद
दूसरी तरफ, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस फैसले पर अपनी असहमति जताते हुए इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा:
- यह विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि आजादी के पहले से चला आ रहा एक पुराना कानूनी मामला है जो निचली अदालतों से लेकर उच्चतम न्यायालय तक का सफर तय कर चुका है।
- एएसआई (ASI) की जिस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला आया है, हमारी समिति उसका गहराई से कानूनी और तकनीकी परीक्षण कर रही है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वे की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के विपरीत संबंधित मुस्लिम पक्ष को कई बार जांच और निगरानी प्रक्रिया से दूर रखा गया। इसलिए वे इस रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते और न्याय के लिए जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।











