‘मध्य पूर्व में महायुद्ध टला? ट्रंप का दावा- खाड़ी देशों के दबाव में रोका ईरान पर सैन्य हमला; ईरान की दोटूक- हमारी फौज पहले से “ज्यादा मजबूत”, दुस्साहस का देंगे भयानक जवाब!’
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ट्रुथ सोशल पर बड़ा दावा— खाड़ी देशों के नेताओं के कहने पर टाला ईरान पर मंगलवार को होने वाला हमला। इधर ईरान ने दी सख्त चेतावनी, मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही बोले— हमारी फौज पहले से ज्यादा तैयार, हर आक्रामकता का देंगे बड़ा जवाब। PNN24 की विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News): मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सैन्य नेतृत्व के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि वे आज (मंगलवार) ईरान पर एक बड़ा सैन्य हमला करने वाले थे, लेकिन खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने इसे रोक दिया है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि उसकी फौज किसी भी आक्रामकता का जवाब देने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तैयार और मजबूत है।
1. ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पर बड़ा खुलासा: इन तीन नेताओं ने रोका हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सिलसिलेवार पोस्ट कर पूरी दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने लिखा:
- कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नहयान ने उनसे संपर्क किया था।
- इन तीनों शीर्ष नेताओं ने अमेरिका से अपील की कि ईरान पर मंगलवार को होने वाले तय सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया जाए, क्योंकि इस समय बैकचैनल से गंभीर बातचीत चल रही है।
- खाड़ी देशों के नेताओं का मानना है कि एक ऐसा समझौता मुमकिन है जो अमेरिका, मध्य पूर्व और दुनिया के अन्य देशों के लिए स्वीकार्य होगा, जिसकी सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।
ट्रंप की अमेरिकी सेना को चेतावनी: “इन नेताओं के सम्मान के कारण मैंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैनियल केन और अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि हम कल ईरान पर हमला नहीं करेंगे। लेकिन मैंने उन्हें यह भी कहा है कि अगर कोई स्वीकार्य समझौता नहीं होता है, तो वे तुरंत ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला करने के लिए तैयार रहें।”
2. ईरान का पलटवार: “दुश्मन की आक्रामकता का सख्ती से देंगे जवाब”
ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान के ‘खातम अल अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर’ के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही का बड़ा बयान सामने आया है। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा:
“ईरान की फौज अब पहले से ‘ज्यादा तैयार और मजबूत’ है। हमारी सेना हमेशा मुस्तैद है और किसी भी दुश्मन की आक्रामकता का सख्ती के साथ बड़े पैमाने पर जवाब देगी।”
3. ईरान के पूर्व कमांडर का ट्रंप पर तंज: “खुद ही तारीख तय करते हैं, खुद ही रद्द करते हैं”
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई ने भी इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति का मजाक उड़ाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा: “ये खुद ही सैन्य हमले की तारीख तय करते हैं और फिर खुद ही उसे रद्द कर देते हैं। इस बेकार उम्मीद में कि ईरानी जनता और अधिकारी हार मान लेंगे। ताकतवर सेना और महान ईरानी जनता के हौसले इन्हें पीछे हटने और हार मानने पर मजबूर कर देंगे।”
4. अमेरिका में गिरती लोकप्रियता और चुनाव का डर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर हमले को टालने के पीछे ट्रंप का एक घरेलू राजनीतिक कारण भी है। दरअसल, इस संभावित युद्ध को लेकर अमेरिकी जनता में भारी नाराजगी है, जिससे ट्रंप की लोकप्रियता गिर रही है।
- सर्वे के आंकड़े: ‘न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना’ द्वारा सोमवार को जारी किए गए ताजा सर्वे के अनुसार, करीब 64% अमेरिकी वोटरों का मानना है कि ईरान के साथ युद्ध में जाना एक गलत फैसला था।
- राजनीतिक संकट: ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि अगर अमेरिका इस युद्ध में कूदता है, तो रिपब्लिकन पार्टी को आगामी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) में भारी राजनीतिक नुकसान और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
📝 विशेष कॉलम: मोरबतियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)
काका का नज़रिया: “बबुआ, सुपरपावर होने का मतलब ई नहीं है कि जब मन किया दुनिया के किसी भी कोने में बारूद बरसा दो; ट्रंप साहब को अपनी गिरती लोकप्रियता और 64% जनता का गुस्सा दिख गया, तो खाड़ी देशों का बहाना बनाकर ‘यू-टर्न’ ले लिए!”
आज वाशिंगटन और तेहरान के बीच मचे इस कूटनीतिक घमासान पर चर्चा गरम थी। काका ने चाय का कुल्हड़ हाथ में थामते हुए अपनी मोरबतिया सुलझाई और मुस्कुराए।
काका बोले: “बबुआ, डोनाल्ड ट्रंप का मिजाज तो तुम जानते ही हो। पहले खुद ही बाजा बजाकर कहेंगे कि ‘कल हमला करने वाले हैं’ और फिर ट्रुथ सोशल पर आकर लिखेंगे कि ‘सऊदी प्रिंस और कतर के अमीर ने पैर पकड़ लिए तो हमला रोक दिया’। अरे साहब, ये कोई गली-मोहल्ले की लड़ाई है क्या कि कोई बीच-बचाव करने आ गया? असल बात तो न्यूयॉर्क टाइम्स का वो सर्वे है, जिसने ट्रंप साहब के होश उड़ा दिए हैं। जब देश की 64 फीसदी जनता कह रही है कि ईरान से लड़ना बेवकूफी है, तो मध्यावधि चुनाव के डर से पैर तो पीछे खींचने ही पड़ेंगे।”
मैंने पूछा— “काका, मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही और मोहसिन रेजाई के बयानों को आप कैसे देखते हैं?”
काका का जवाब: “बबुआ, ईरान भी जानता है कि अमेरिका इस वक्त अंदरूनी राजनीति में फंसा है। इसीलिए मोहसिन रेजाई ने सही तंज कसा है कि खुद ही तारीख तय करते हो और खुद ही रद्द करते हो। लेकिन मध्य पूर्व का ये खेल बड़ा खतरनाक है। भले ही आज हमला टल गया हो, लेकिन जब तक परमाणु समझौते पर कोई ठोस बात नहीं बनती, तब तक बारूद के इस ढेर पर चिंगारी का खतरा बना रहेगा। काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं होता, अच्छा हुआ जो खाड़ी देशों ने बीच में आकर ट्रंप के ‘बुलडोजर’ को ब्रेक लगा दिया, वरना दुनिया एक और भयानक मंदी की खाई में गिर जाती’।”










